ब्रह्मचर्य साधना
Brahmacharya Sadhana
स्वामी शिवानन्द सरस्वती द्वारा
स्रोत: 1980 Hindi 2nd Edition (Yoga-Vedanta Forest Academy) · Yoga-Vedanta Forest Academy / The Divine Life Trust Society, Rishikesh · 1980 (उद्गम)
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ब्रह्मचर्य साधना
स्वप्न नहीं होते तो आप ब्रह्मचर्य या पवित्रता में उन्नति कर रहे हैं।
सदा कौपीन पहनिये। आपको ग्रंथकोष के कोई भी रोग नहीं होंगे। इससे आपको ब्रह्मचर्य के रक्षण में भी सहायता मिलेगी। जब निद्रा में वीर्य-पात होता है तो मन जो सूक्ष्म शरीर में कार्य कर रहा था, वह प्रचंडता से उत्तेजित होकर एकाएक स्थूल शरीर में प्रवेश हो जाता है। स्वप्नदोष का यही कारण है। बहुधा अशुद्ध स्वप्नों के कारण भी ऐसा होता है। जो सात्विक भोजन करते हैं उन्हें स्वप्न दोष नहीं होता। शम, दम, सात्विक भोजन तथा इस पुस्तक के बताए हुए अन्य आध्यात्मिक अभ्यासों के द्वारा इसका अवरोध किया जा सकता है।
स्वप्न दोष प्रायः रात्रि के पिछले पहर में हुआ करते हैं। जो मनुष्य प्रातःकाल तीन और चार बजे के बीच में उठ जाया करते हैं, वे स्वप्न-दोष रूपी रोग से व्यथित नहीं होते। यदि आपको रात्रि में स्वप्न दोष हो जाय तो प्रातःकाल में शीघ्र स्नान कर लेना चाहिए। फिर वीस प्राणायाम कर ध्यान करना चाहिए। और धीरे आप इस रोग से मुक्त हो जायेंगे।
यदि आपको रात्रि में स्वप्न-दोष अधिक होता हो तो सोते समय गीली लंगोट पहिन कर सोइए। 'द्विग्न गाय' (कटि स्नान) लीजिए।
रात्रि में आपको जब जब पेशाब करने की इच्छा हो, शीघ्र ही उठकर पेशाब कीजिए। पेशाब को रोकना