भारतकोश
ब्रह्मचर्य विज्ञान

ब्रह्मचर्य विज्ञान

Brahmacharya Vigyaan

पं. जगन्नारायणदेव शर्मा द्वारा

स्रोत: Sarvahitkari Grantha Mala · Sarvahitkari (उद्गम)

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प्रसन्नचर्य-विज्ञान

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सुसज्जीकरण पर सुगंध होकर बहुत सी स्त्रियाँ भी दुष्कर्म में प्रवृत्त हो जाती हैं ।

अब हम वेश्याओं से होने वाली कुछ हानियों को नीचे देते हैं-

( १ ) वेश्या-गमन से पुरुष महा पातकी हो जाता है ।

( २ ) वेश्यागामी का अन्तःकरण इतना मलिन हो जाता कि वह अपने कुटुम्ब की स्त्रियों पर भी कुट्टि डाल देता है ।

( ३ ) वेश्यागमन से निश्चय ही भयङ्कर रोग उत्पन्न हो जाते हैं ।

( ४ ) वेश्यागामी पुरुष कभी-कभी नर-हत्या या आत्म-हत्या भी कर बैठता है ।

( ५ ) वेश्यागामी का कुल कभी उन्नत नहीं हो सकता उसकी सम्पात्ति, कीर्ति और धर्म का नाश हो जाता है ।

(४) पर-स्त्री-गमन

नहीदधमनायुष्मं, लोके किञ्चन दृश्यते ।

यादृशं पुरुषस्थेह, परदाग्नोप सेवनम् ॥

( मनुस्मृति

इस संसार में पुरुष का आयुर्वैल चीख करने वाला पेर कोई भी कार्य नहीं है, जैसा कि पराई स्त्री के साथ रमण करना है हमारे समाज में कुछ ऐसे भी पुरुष हैं, जो प्रत्यक्ष रूप में वेश्याओं की तो निन्दा करते हैं, पर उनके विचार में पर-स्त्री-गमन बुरा नहीं है । कारण इसका यह बताते हैं कि वेश्याओं से रोग व उत्पत्ति होती है, पर गृहस्थ स्त्रियों से ऐसी सम्भावना नहीं ।