संक्षिप्त ब्रह्माण्ड पुराण (खण्ड १ व २)
Brahmanda Purana
महर्षि वेदव्यास द्वारा
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थे एवं वज्र की उपमा के आकार वाले थे तथा आयुधों के सहित एवं परि- च्छदों से युक्त थे दिए थे । २५। इसके अनन्तर उन दोनों शिवा और शिव का परम मंगल अभिषेक किया था। इसके उपरान्त एक विमान बनवाया था जिसका नाम कुसुमाकर था । २६। इसकी रचना विधाता ने की थी जो कि अम्लान मालाओं वाला था तथा नित्य ही आयुधों के द्वारा अभेद्य था । यह इच्छा के अनुरूप दिवलोक और भूलोक में गमन करने वाला तथा सुसमृद्धि से समन्वित था ।२७। जिसके केवल गन्ध से ही भ्रान्तिक्षुधा-रोग और आर्ति सब नष्ट हो जाया करती हैं और यह मन के आह्लाद को करने वाला तथा परम शुभ था । २८।
तद्विमानमथारोप्य तावुभौ दिव्यदंपती । चामरव्यजनच्छत्रध्वजयष्टिमनोहरम् ।।२९ वीणावेणुमृदंगादिविविधैस्तौर्यवादनैः । सेव्यमाना सुरगणैर्निर्गत्य नृपमन्दिरात् ।।३० ययौ वीथीं विहारेण शोभायन्ती निजौजसा । प्रतिहर्म्याग्रसंस्थाभिरप्सरोभिः सहस्रशः ।।३१ सलाजाक्षतहस्ताभिः पुरंध्रीभिश्च वर्षिता । गाथाभिर्मंगलार्थाभिर्वीणावेण्वादिनिस्वनैः । तुष्यन्ती वीथिवीथीषु मन्दमन्दमथाययौ ।।३२ प्रतिगृह्याप्सरोभिस्तु कृतं नीराजनाविधिम् । अवरुह्य विमानाग्रात्प्रविवेश महासभाम् ।।३३ सिंहासनमधिष्ठाय सह देवेन शम्भुना । यद्यद्वांछंति तत्रस्था मनसैव महाजनाः । सर्वज्ञा साक्षिपातेन तत्तत्कामानपूरयत् ।।३४ तद्दृष्ट्वा चरितं देव्या ब्रह्मा लोकपितामहः । कामाक्षीति तदाभिख्यां ददौ कामेश्वरीति च ।।३५
उस विमान पर ये दोनों शुभ दम्पती समारूढ़ होकर नृप मन्दिर से बाहिर निकले थे। इस विमान में चमर-व्यजन-छत्र-ध्वजा आदि से परम