भारतकोश
बृहदारण्यकोपनिषद् (शाङ्करभाष्य सहित)

बृहदारण्यकोपनिषद् (शाङ्करभाष्य सहित)

Brihadaranyaka Upanishad with Shankara Bhashya

आदि शङ्कराचार्य द्वारा

स्रोत: Gita Press Gorakhpur · Gita Press, Gorakhpur (उद्गम)

DevanagariSanskritpublished1,402 पृष्ठ

पृष्ठ 1178, कुल 1402 में से

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पृष्ठ 1178
११६४बृहदारण्यकोपनिषद्[ अध्याय ५
संस्कृत-भाष्यहिन्दी-अनुवाद
पूर्णस्य कार्यात्मनो ब्रह्मणः पूर्णं पूर्णत्वमादाय गृहीत्वा आत्मस्वरूपैकरसत्वमापद्य, विद्यया अविद्याकृतं भूतमात्रोपाधिसंसर्गजमन्यत्वाभासं तिरस्कृत्य पूर्णमेवानन्तरमबाह्यं प्रज्ञानघनैकरसस्वभावं केवलं ब्रह्मावशिष्यते ।इस पूर्ण यानी कार्यरूप ब्रह्मका सम्पूर्ण पूर्णत्व 'आदाय'—लेकर अर्थात् उसे आत्मस्वरूपके साथ एकरस करके विद्याके द्वारा अविद्याकृत भूतमात्रोपाधिके संसर्गसे होनेवाली भेद-प्रतीतिको मिटा देनेपर पूर्ण ही अर्थात् अन्तरबाह्यशून्य प्रज्ञानघनैकरसस्वरूप शुद्ध ब्रह्म ही शेष रहता है ।
['ब्रह्म वै' इत्यादि-मन्त्रेण समानार्थत्व-प्रदर्शनम्]<br>यदुक्तम् 'ब्रह्म वा इदमग्र आसीत् तदात्मानमेवावेत् तस्मात्तत् सर्वमभवत्' (१ । ४ । १०) इत्येषोऽस्य मन्त्रस्यार्थः । तत्र ब्रह्मेत्यस्यार्थः पूर्णमद इति । इदं पूर्णमिति ब्रह्म वा इदमग्र आसीदित्यस्यार्थः । तथा च श्रुत्यन्तरम् "यदेवेह तदमुत्र यदमुत्र तदन्विह" (क० उ० २ । १ । १०) इति । अतोऽदःशब्दवाच्यं पूर्णं ब्रह्म तदेवेदं पूर्णं कार्यस्थं नामरूपोपाधिसंयुक्तमविद्ययोद्रिक्तम् । तस्मादेव परमार्थस्वरूपादन्यदिव प्रत्यवभासमानम् । तद् यदात्मानमेव परं पूर्णं ब्रह्म विदित्वा 'अहमदः पूर्णंपहले जो यह कहा गया था 'ब्रह्म¹ वा इदमग्र आसीत् तदात्मानमेवावेत् तस्मात् तत् सर्वमभवत्' यही इस मन्त्रका भी अर्थ है । इसमें 'ब्रह्म' इस पदका अर्थ है 'पूर्णमदः' और 'इदं पूर्णम्' यह 'ब्रह्म वा इदमग्र आसीत्' इस वाक्यका अर्थ है । ऐसी ही एक दूसरी श्रुति भी है "यदेवेह² तदमुत्र यदमुत्र तदन्विह ।" अतः 'अदः' शब्दवाच्य जो पूर्णब्रह्म है वही 'इदं पूर्णम्' अर्थात् कार्यवर्गमें स्थित नाम-रूपात्मक उपाधिसे युक्त अविद्याजनित (कार्यब्रह्म) है । वह उसी परमार्थस्वरूप परब्रह्मसे अन्यके समान प्रतीत होता है । ऐसी स्थितिमें जब अपनेको ही पूर्ण परब्रह्म जानकर 'मैं ही वह पूर्ण ब्रह्म हूँ'

१. आरम्भमें यह एक ब्रह्म ही था, उसने अपनेको जाना, इसलिये वह सर्व हो गया ।
२. जो यहाँ है, वही परलोकमें है और जो परलोकमें है, वही यहाँ (इस देहेन्द्रियरूप उपाधिमें) है ।