बृहन्नारदीय पुराण (संस्कृत मूल व हिन्दी व्याख्या)
Brihan Naradiya Purana with Sanskrit & Hindi Commentary
महर्षि व्यास द्वारा
स्रोत: चौखम्बा संस्कृत संस्थान · चौखम्बा संस्कृत संस्थान (उद्गम)
पृष्ठ 775, कुल 1008 में से
संदर्भ में पढ़ें७५६ नारदीयपुराणम् औदार्यभावसाध्या च स्थूलसूक्ष्मातिरूपिणी । शिरीषपुष्पमृदुला गांगेयमुकुरप्रभा ॥१९४॥ नीलोत्पलजिताक्षी च सद्रत्नकवरान्विता । प्रेमपर्यंकनिलया तेजोमण्डलमध्यगा ॥१९५॥ कृष्णांगगोपनाऽभेदा लीलावरननायिका । सुधासिंधुसमुल्लासामृतास्यंदविधायिनी ॥१९६॥ कृष्णचित्ता रासचित्ता प्रेमचित्ता हरिप्रिया । अचिंत्यगुणग्रामा कृष्णलीला मलापहा ॥१९७॥ राससिंधुशशांका च रासमंडलमंडिनी । नतव्रता सिंहरीच्छा सुमतिः सुरवंदिता ॥१९८॥ गोपीचूडामणिर्गोपी गणेड्या विरजाधिका । गोपश्रेष्ठा गोपकन्या गोपनारी सुगोपिका ॥१९९॥ गोपधामा सुदामांबा गोपाली गोपमोहिनी । गोपभूषा कृष्णभूषा श्रीवृन्दावनचंद्रिका ॥२००॥ वीणादिघोषनिरता रासोत्सवविकासिनी । कृष्णचेष्टा परिज्ञाता कोटिकंदर्पमोहिनी ॥२०१॥ श्रीकृष्णगुणगानाढ्या देवसुन्दरिमोहिनी । कृष्णचंद्रमनोज्ञा च कृष्णदेवसहोदरी ॥२०२॥ कृष्णामिलाषिणी कृष्णप्रेमानुग्रहवांछिता । क्षेमा च मधुरालापा भुवोमाया सुभद्रिका ॥२०३॥ प्रकृतिः परमानंदा नीपद्रुमतलस्थिता । कृपाकटाक्षा बिम्बोष्ठी रंभा चारुनितंबिनी ॥२०४॥ स्मरकेलिनिधाना च गंडताटंकमंडिता । हेमाद्रिकांतिरुचिरा प्रेमाद्या मदमंथरा ॥२०५॥ कृष्णंचिता प्रेमंचिता रतिंचिता च कृष्णदा । रासंचिता भावंचिता शुद्धंचिता महारसा ॥२०६॥ अखिललोकनिवासिनी, अमृतरूपा, अद्भुतरूपा, श्रीमन्नारायण के समान स्तुत्य होने वाली, अक्षरस्वरूपा, कूटस्था (एकरस परमात्मरूपा), महापुरुष से उत्पन्न होने वाली, उदारभाव से उपासना करने योग्य, अत्यन्त स्थूल एवम् सूक्ष्म रूप वाली, शिरीष पुष्प के समान मृदुल, सुवर्ण तथा शीशे के समान प्रभावानी, नीलकमल को पराजित करने वाले नेत्रों से युक्त, उत्तम रत्नों से सुशोभित चोटी वाली, प्रेम पर्यंक पर शयन करने वाली, तेजोमंडल के बीच गमन करने वाली ॥१९४-१९५॥ कृष्ण की अंगरक्षिका, कृष्ण से अभिन्न, खेल में नायिका का भाग लेने वाली, सुधासिंधु को तरंगित करने वाली, अमृतवर्षा करने वाली, कृष्ण में चित्त को लगाने वाली, रास में दत्तचित्त, प्रेमाद्रं चित्त वाली, हरि की प्रिया, अचिन्त्य गुणों वाली, कृष्ण के साथ विलास करने वाली, मल दूर करने वाली, राससिंधु के लिए चन्द्रमा- स्वरूपा, रासमंडली को मंडित करने वाली, व्रतशीला, सिंह तथा रीछ का वाहन करने वाली, सुन्दर रूप वाली, देवों से वंदिता, गोपियों की चूडामणि, गोपीवृन्द से स्तुत्य, विरजा नाम वाली, उत्तम सखी, गोपों की अतिशय प्रिय, गोपकन्या, गोपनारी, सुगोपिका, गोपधामा, सुदामा की माता, गोपाली, गोपमोहिनी, गोपभूषा, कृष्णभूषा, श्रीवृन्दावन की चंद्रिका, वीणा बजाने में निरत, रासोत्सव करने वाली, कृष्ण की तरह चेष्टा करने वाली, अत्यन्त परिचित, कोटिकंदर्पमोहिनी, श्रीकृष्ण के गुणों का वर्णन करने वाली, देव-सुन्दरियों को मोहित करने वाली, कृष्ण चन्द्र की तरह मनोरम, कृष्णदेव की सहोदरी (अर्थात् योगमायारूप में यशोदा के गर्भ से उत्पन्न होने वाली), कृष्ण की अभिलाषा करने वाली, कृष्ण के प्रेम एवम् अनुग्रह की इच्छुक, कल्याण करने वाली, मधुर भाषण करने वाली, पृथ्वी पर माया कहलाने वाली, सुभद्रिका, प्रकृति, परमानन्दरूपिणी, कदम्ब वृक्ष के नीचे रहने वाली, कृपाकटाक्ष करने वाली, बिम्बोष्ठी, कदलीस्तम्भ की तरह जंघा वाली, शोभन नितम्ब वाली, कामक्रीडा-निधान, कपोल की शोभा बढाने वाले कर्णाभूषणों से युक्त, सुमेरु पर्वत की तरह मनोहर कांति वाली, आद्यप्रेमस्वरूपा, मद से अलसानेवाली ॥१९६-२०५॥ कृष्ण का चिन्तन करने वाली, प्रेमचिन्तन करने वाली, अतिचिन्तन करने वाली कृष्णभक्ति प्रदान करने वाली, शुद्ध चिन्तन