बृहत्पाराशर होरा शास्त्र (महर्षि पराशर - सम्पूर्ण फलित ज्योतिष महाकोश सान्वय सटीक)

बृहत्पाराशर होरा शास्त्र (महर्षि पराशर - सम्पूर्ण फलित ज्योतिष महाकोश सान्वय सटीक)
Brihat Parashara Hora Shastra of Maharshi Parasara with Commentary
महर्षि पराशर (टीकाकार: पं. गणेशदत्त पाठक / सीताराम झा) द्वारा
DevanagariHindipublished800 पृष्ठ
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- ग्रहाणामवस्थाध्यायः २५३ नृत्यलिप्सा अवस्था में हो तो काव्य करने वाला, बुद्धिमान्, वीणा, मृदंग आदि बाजों को बजाने में चतुर और धन की उन्नति करने वाला होता है।।१२१।। कौतुकभवनं गतवति शुक्रे शक्रेशत्वं सदसि महत्त्वम्। हृद्या विद्या भवति च पुंसः पद्मा निवसति सद्मादरतः।।१२२।। कौतुक अवस्था में हो तो इन्द्र के समान पराक्रमी, सभा में चतुर, उत्तम विद्या और गृह मे सदा लक्ष्मी के वास वाला होता है।।१२२।। परसेवारतो नित्यं निद्रामुपगते कवौ। परनिन्दापरो वीरो वाचालो भ्रमते महीम्।।१२३।। यदि निद्रावस्था में हो तो दूसरे की सेवा करने वाला, दूसरे की निंदा करने वाला; व्यर्थ बोलनेवाला और व्यर्थ घूमने वाला होता है।।१२३।। अथ शनेरवस्थाफलम्- क्षुत्पिपासापरिक्रान्तो विश्रान्तः शयने शनौ। वयसि प्रथमे रोगी ततो भाग्यवतां वरः।।१२४।। यदि शनि शयनावस्था में हो तो जातक बाल्यकाल में रोगी, भूख-प्यास से पीडित रहता है, परन्तु वृद्धावस्था में भाग्यवान् होता है।।१२४।। भानोः सुते चेदुपवेशनस्थे करालकारातिजनानुतप्तः। अपायशाली खलु दद्रुमाली नराऽभिमानी नृपदण्डयुक्तः।।१२५।। उपवेशन अवस्था में हो तो प्रबल शत्रु द्वारा पीड़ित, व्यर्थ अपव्यय करने वाला, दाद-खुजली रोग वाला, अभिमानी और राजदंड से दंडित होता है।।१२५।। नयनपाणिगते नृपनन्दने परमया रमया रमया युतः। नृपतितो हिततो मतितोषकृद्बहुकलाकलितो विमलोक्तिकृत्।।१२६।। नेत्रपाणि अवस्था में हो तो परम सुंदरी स्त्री और संपत्ति से युक्त, राजा और मित्रों से उपकृत, अनेक कलाओं का ज्ञाता और प्रिय बोलने वाला होता है।।१२६।। नानागुणग्रामधनाधिशाली सदां नरो बुद्धिविनोदमाली। प्रकाशने भानुसुते सुभानुः कृपानुरक्तो हरपादभक्तः।।१२७।। प्रकाश अवस्था में हो तो अनेक गुण-ग्राम-धन से युक्त, बुद्धिमान्,