भारतकोश
बृहत्पाराशर होरा शास्त्र (महर्षि पराशर - सम्पूर्ण फलित ज्योतिष महाकोश सान्वय सटीक)

बृहत्पाराशर होरा शास्त्र (महर्षि पराशर - सम्पूर्ण फलित ज्योतिष महाकोश सान्वय सटीक)

Brihat Parashara Hora Shastra of Maharshi Parasara with Commentary

महर्षि पराशर (टीकाकार: पं. गणेशदत्त पाठक / सीताराम झा) द्वारा

DevanagariHindipublished800 पृष्ठ

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पृष्ठ 575

अथ प्राणदशा फलाध्यायः। ५७५ सूर्य सूक्ष्मदशामध्येप्राणदशा चक्रम्।

ग्रहाःसू.चं.मं.रा.वृ.श.बु.के.शु.यो.
घट्य१६
पला.४८२१५६२५३३१७५६४२१२
विपला३६४२४८३६५४५२४२
अथ सूर्य प्राणदशाफलम्-
पौंश्चल्यं विषजावाधा शोषणं विषमेक्षणम् ।
सूर्यप्राणदशायां तु मरणं कृच्छ्रमादिशेत् ।।२।। (सू.सू.)
सूर्य के सूक्ष्मांतर में सूर्य के प्राण में दुराचार, विष की बाधा, शरीर में शुष्कता,
नेत्र में विकार और मरण होता है।।२।।
सुखं भोजनसम्पत्तिः संस्कारो नृपवैभवम् ।
उदारादिकृपाभिश्च रवेः प्राणगते विधौ ।।३।। (सू.चं.)
सूर्य के सूक्ष्मांतर में चन्द्रमा की प्राणदशा में सुख, भोजन की सामग्री, संस्कार
और उदार पुरुष की कृपा से राजवैभव की प्राप्ति होती है।।३।।
भूपोपद्रवमन्यार्थे द्रव्यनाशो महद्भयम् ।
महत्यपचयप्राप्ति रवेः प्राणगते कुजे ।।४।। (सू.मं.)
सूर्य के सूक्ष्मांतर में भौम की प्राण दशा में राजा के उपद्रव की वृद्धि, धन
की क्षति, भय और धनादिका अपचय (हानि) होता है।।४।।
अन्नोद्भवा महापीड़ा विषोत्पत्तिर्विशेषतः ।
अर्थाग्निराजभिः क्लेशं रवेः प्राणगतेप्यहो ।।५।। (सू.रा.)
सूर्य के सूक्ष्मान्तर राहु की प्राणदशा में अन्न से उत्पन्न महापीड़ा (हैजा आदि)
विशेषतः विष की संभावना, धन, अग्नि और राजा से कष्ट होता है।।५।।
नानाविद्यार्थसम्पत्तिः कार्यलाभो गतागतैः ।
नीचजनाश्रय नाशो रवेः प्राणगते गुरौ ।।६।। (सू.वृ.)
सूर्य के सूक्ष्मान्तर में गुरु की प्राणदशा में अनेक विद्या, धन सम्पत्ति का लाभ,
गमना-गमन से कार्य की सिद्धि और नीचजनों की संगति का नाश होता है।।६।।
बंधनं प्राणनाशश्च चित्तोद्वेगस्तथैव च ।
बहुबाधा महाहानी रवेः प्राणगते शनौ ।।७।। (सू.श.)