बृहत्पाराशर होरा शास्त्र (महर्षि पराशर - सम्पूर्ण फलित ज्योतिष महाकोश सान्वय सटीक)
Brihat Parashara Hora Shastra of Maharshi Parasara with Commentary
महर्षि पराशर (टीकाकार: पं. गणेशदत्त पाठक / सीताराम झा) द्वारा
पृष्ठ 643, कुल 800 में से
संदर्भ में पढ़ेंअथ रश्मिफलवर्णनाध्यायः । ६४१ आत्रिंशत्परतः श्रीमान्सर्वसत्वसमन्वितः । राजप्रियश्च चंडश्च जनैश्च बहुभिर्युतः ।।३१।। इसके बाद ३० रश्मि तक मनुष्य श्रीमान् सभी सत्वों से युक्त, राजप्रिय, प्रचंड और अनेक जनों से युक्त होता है।।३१।। एकत्रिंशत्शुस्त्रिंशत्यावद्रश्मिफलम् - एकत्रिंशे तु सचिवः द्वात्रिंशे वाहिनीपतिः । अत ऊर्ध्वं तु सामंत श्रातुःत्रिंशत्कपरावधिः ।।३२।। रश्मियोग ३१ हो तो राजमंत्री होता है, ३२ में सेनापति इसके बाद ३४ तक रश्मियोग में मांडलिक राजा होता है।।३२।। पंचत्रिशद्रश्मिफलम् - अत ऊर्ध्वं नृपे श्रांतः आपंचत्रिंशतः क्रमात् । शतपंचकमारम्य सहस्रावधिपोषकः ।।३३।। ३५ रश्मियोग हो तो मनुष्य राज्याधिकार के क्रम से परिश्रम करने से ५०० से १००० तक जनों का भरण पोषण करनेवाला होता है।।३३।। अत ऊर्ध्वं तु देशानां पोषकाः स्युः पंचविंशतिः । षडविंशतिश्च भानि स्युस्त्रिंशत् षड्त्रिंशदेव च ।।३४।। इसके बाद ३६ रश्मियोग में २५ ग्रामों का, ३७ रश्मियोग में २६ ग्रामों का, ३८ रश्मियोग में २७ ग्रामों का, ३९ रश्मियोग में ३० ग्रामों का और ४० रश्मियोग में ३६ ग्रामों का पालक होता है।।३४।। अत ऊर्ध्वं नृपाः क्षात्रधर्मिणः क्षत्रियोऽथवा । भूद्वित्र्यब्धीसुषट्सप्तभूभृज्जनपदाधिपाः ।।३५।। इसके बाद ४० रश्मियोग हो तो क्षत्रिय जातीय बालक राजा होता है। अन्य जातीय मनुष्य क्षत्रिय धर्म को पालन करता हुआ ४० से ४७ रश्मियोग में क्रम से १, २, ३, ४, ५, ६, ७ ग्रामों के राजाओं का शासक होता है।।३५।। पंचाशद्रश्मि संयोगे सम्राट् स्यादनुपातातः । अत ऊर्ध्वं तु देवेन्द्रतुल्यः स्युरिति पद्मभूः ।।३६।। इसके बाद ५० रश्मि योग में पुरुष सम्राट् होता है, इससे न्यून होने पर