भारतकोश
बृहत्पाराशर होरा शास्त्र (महर्षि पराशर - सम्पूर्ण फलित ज्योतिष महाकोश सान्वय सटीक)

बृहत्पाराशर होरा शास्त्र (महर्षि पराशर - सम्पूर्ण फलित ज्योतिष महाकोश सान्वय सटीक)

Brihat Parashara Hora Shastra of Maharshi Parasara with Commentary

महर्षि पराशर (टीकाकार: पं. गणेशदत्त पाठक / सीताराम झा) द्वारा

DevanagariHindipublished800 पृष्ठ

पृष्ठ 762, कुल 800 में से

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पृष्ठ 762

७५० वृहत्पाराशरहोराशास्त्रम् । पाराशर जी बोले— हे द्विजश्रेष्ठ ! सत्ययुग में धर्म की पूर्णता के कारण मनुष्य तपस्वी होते थे इस कारण भूत, भविष्य और वर्तमान को जानते थे।।२।। त्रेतायां तपसा युक्ताः केचिज्जानन्ति वै द्विजाः । पश्यन्ति द्वापरे शास्त्रज्ञानेन तपसापि च ।।३।। हे द्विज! त्रेता में केवल तपस्या से कुछ लोग जानते थे। द्वापर में तपस्या और शास्त्रज्ञान द्वारा जानते थे।।३।। कलौ युगे तु धर्मस्य पादमात्र व्यवस्थितिः । तपः शक्त्या तु तज्ज्ञातुं न शक्ता मानवाभुवि ।।४।। और कलियुग में १ चरण ही धर्म रहता है अतः तपस्या द्वारा ज्ञान को नहीं प्राप्त कर सकते हैं।।४।। ज्योतिषशास्त्रज्ञाने उपायः- तथात्र परमः शंभुर्लोकानुग्रहकांक्षया । लक्षीकृत्य निजां शक्तिं विद्यामाधत्स ईश्वरः ।।५।। संसार के ऊपर अनुग्रह की बुद्धि से परमदयालु श्री शंकरजी अपनी शक्ति से आदि विद्या त्रिकालज्ञान को देने वाली अपनी कला से विभक्त कर उत्पन्न किया।।५।। कलापि च विभक्तानां त्रिकालज्ञानदायिनी । वेदादि वाग्भवागौरीवदद्वयमथोगिरिः ।।६।। परमैश्वर्यसिद्ध्यर्थ वाग्भवास्यादयं मनुः । सर्वज्ञेतिपदं पूर्व नाथ तं पार्वतीपते ।।७।। सर्वलोकगुरोः पश्चाच्छिवेति द्वयमक्षरम् । शरणं तु पदं पश्चात्त्वां प्रपन्नोऽस्मितत्परम् ।।८।। पालयेति पद ज्ञानं प्रदापय ततः परम् । वह मंत्र निम्नलिखित हैं 'ॐ ऐं गौरी वदवदगिरिपरमैश्वर्य सिध्यर्थं ऐं' यह शक्ति का मंत्र है। "सर्वज्ञनाथपार्वतीपते सर्वलोकगुरो शिव शरणं त्वां प्रपन्नोस्मि पालय ज्ञानं प्रदापय" यह शिवजी का मंत्र है।।६-८।। विनियोगादिकम् - ऋषिस्तु दक्षिणामूर्तिर्गौरी परमेश्वरी तथा ।।९।।