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बृहत्पाराशर होरा शास्त्र (महर्षि पराशर - सम्पूर्ण फलित ज्योतिष महाकोश सान्वय सटीक)

Brihat Parashara Hora Shastra of Maharshi Parasara with Commentary

महर्षि पराशर (टीकाकार: पं. गणेशदत्त पाठक / सीताराम झा) द्वारा

DevanagariHindipublished800 पृष्ठ

७८७ अन्तरदशादिक्रमम् । कुम्भांश में मकर दशा वर्ष ४ में अन्तर्दशा

मेवृमिवृमेमीकुं
मा
दि२३१७१७२३
२३२९२६३५३५२६२९२३
५२३८४५२५२५४५३८५५
कुम्भांश में धन दशा वर्ष १०
में अन्तर्दशा
मेवृमिवृमेमीकुं
:---:---:---:---:---:---:---:---:---:---
मा१०१११११०
दि१३१३२३२३
४४३६५८२१५८३६४४२९२९
३३४२३३५२३८३८
कुम्भांश में मेष दशा वर्ष १७
में अन्तर्दशा
मेवृमिवृमेमीकुं
:---:---:---:---:---:---:---:---:---:---
मा१०१०
दि
३१४७१६४७३१३६२६२६३६
४८१०४८५२४५४५५२
कुम्भांश में वृष दशा वर्ष १६
में अन्तर्दशा
वृमिवृमेमीकुंमे
:---:---:---:---:---:---:---:---:---:---
मा११११
दि२४
२१३४२१४७५८३५३५५८४७
४१४२४१३३२५२५३३
कुम्भांश में मिथुन दशा वर्ष ९
में अन्तर्दशा
मिवृमेमीकुंमेवृ
:---:---:---:---:---:---:---:---:---:---
मा११
दि२१२४२४
१९३४१५२१२११५३४
३२३४१०४२४०४०४२१०४२
मीनांश में कर्क दशा वर्ष १२
में अन्तर्दशा
सिंतुवृकुंमी
:---:---:---:---:---:---:---:---:---:---
मा१०११११
दि१६१९११२६१५२१२१
३९३०२०३७३७
४७४७४२५६११४१४१११
मीनांश में सिंह दशा वर्ष ५
में अन्तर्दशा
सिंतुवृकुंमी
:---:---:---:---:---:---:---:---:---:---
मा११
दि१४२६२९२३२३२९१९
१९२२५३३०१८४३४३३२
२०४२१५१५
मीनांश में कन्या दशा वर्ष ४
में अन्तर्दशा
तुवृकुंमीसिं
:---:---:---:---:---:---:---:---:---:---
मा११
दि२३१६१६११
४७४३४४४१४१४४२२
११२६१५४०५१५१४०४६२०

७८८ वृहत्पाराशरहोराशास्त्रम् । मीनांश में तुला दशा वर्ष १६ | मीनांश में वृश्चिक दशा वर्ष ७ में अन्तर्दशा | में अन्तर्दशा

तुवृकुंमीसिंकं
मा१११०१०१०११
दि२११८२७२७२६
३७५०४६५४५४४६३०५३
४११४२६२६४०
वृकुंमीमंसिंतु
मा
दि२५२३२७२७२३१५२६२३
१२१२२०३०४३
५९२४३३३३२४५६४२१५

मीनांश में धन दशा वर्ष १० | मीनांश में मकर दशा वर्ष ४ में अन्तर्दशा | में अन्तर्दशा

कुंमीसिंकंतुवृ
मा१०
दि२८१७१७२८२९१६
३६२६२६३६१८४४४६
१६३०३०१६११४०
मंकुंमीसिंकंतुवृ
मा
दि१७२१२३२७२७
५८५८२६३७४३४१५४१२
३७३७३०४११५५१२६३३

मीनांश में कुंभ दशा वर्ष ४ | मीनांश में मीन दशा वर्ष १० में अन्तर्दशा | में अन्तर्दशा

कुंमीसिंकंतुवृ
मा
दि१७२१२३२७२७१७
५८२६३७४३४१५४१२२६
३७३०४११५५१२६२३३०
मीसिंकंतुवृकुं
मा१०
दि२८२९१६२३२८१७
३६१८४४४६३६२६
१६११४०२४१६३०

इति श्री वृहत्पाराशरहोराशास्त्रं ज्योतिषाचार्य श्री गणेशदत्त पाठक कृत सटीकं सोदाहरणं समाप्तम्। हर प्रकार की पुस्तक मिलने का पता- सावित्री ठाकुर प्रकाशन रथयात्रा, वाराणसी।