चक्रदत्त (चक्रपाणिदत्त - पदार्थचन्द्रिका व हिन्दी व्याख्या सहित)
Chakradatta Hindi
महामहोपाध्याय चक्रपाणिदत्त द्वारा
स्रोत: Chakradatta Chikitsa Sangraha with Hindi Commentary (उद्गम)
पृष्ठ 395, कुल 674 में से
संदर्भ में पढ़ें374 चक्रदत्त — ३९. वृद्ध्यधिकारमु.
पच्चि देवदारुकषायमुनु गोमूत्रमुतो चेर्चि त्रागवलयुनु. मेदसुगोमूत्रमुतो स्वेदिंतमुञ्जेसि सुरसादिगणौषधमुलतो कलिपि लेपनचेयवलयुनु. मूत्रजमगु वृद्धिकि चक्कगा चेमटबट्टिंचि पट्टुवेयवलयुनु. लेनिचो व्रीहीमुखशस्त्रमुतो च्छेदिंपवलयुनु. चेविकोनयन्दु गूबनु वदलिपेट्टि सूदितो काल्पवलयुनु. आन्त्रवृद्धिनि पोगोट्टुटक्कै व्यत्यासमुगा रक्तनाडिनि छेदिंपवलयुनु. अंगुष्ठपुनडिमि चर्ममुनु अंगविपर्ययमुनन्दु काल्पवलयुनु.
—• रास्नाकषायादुलु. •—
श्लो. रास्नायष्ट्यामृतैरण्डबलागोक्षुरसाधितः, क्वाथोऽन्त्रवृद्धिं हन्त्याशु रुबुसैलेन मिश्रितः. 10. तैलमेरण्डजं पीत्वा बलसिद्धपयोन्वितम्, आध्मानशूलोपचिता मन्त्रवृद्धिं जयेन्नरः. 11. हरीतकीं मूत्रसिद्धां सतैलां लवणाम्बितां, प्रातः प्रातश्च सेवेत कफवातामयापहाम्. 12. गोमूत्रसिद्धां रुबुसैलभृष्टां हरीतकीं सैन्धवसम्प्रयुक्तां, खादेन्नरः कोष्णजलानुपानं निहन्ति वृद्धिं चिरजां प्रवृद्धाम्. 13. त्रिफलाक्वाथगोमूत्रं पिबेत्प्रातरतन्द्रितः, कफवातोद्भवं हन्ति श्वयथुं वृषणोत्थितम्. 14. सरळागुरुकोष्ठानि देवदारुमहौषधं, मूत्रारनालसंयुक्तं शोथघ्नं कफवातनुत्. 15. भृष्टोऽरुबुक्तैलेन कल्कः पथ्यासमुद्भवः, कृष्णासैन्धवसंयुक्तो वृद्धिरोगहरः परः. 16.
सन्नरास्न यष्टिमधुकमु तिप्पतीगे आमदमु मुत्तवपुलगमु पल्लेरु वीटितोनैन कषायमुनन्दु आमदपु तैलमुनु चेर्चि त्रागिन आन्त्रवृद्धि नशिंचुनु. मुत्तवपुलगमुतो सिद्धमु चेसिन पालतो आमदमुनु त्रागिन अनाहमु शूल आन्त्रवृद्धि नशिंचुनु. करक्कायुलनु गोमूत्रमुतो सिद्धमु चेसि तैलमु उप्पु कलिपि प्रद्दट बुच्चुकोनिन कफवातरोगमुलु नशिंचुनु. गोमूत्रमुतो सिद्धमुचेसिन आमदमुलो वेयिंचिन करक्कायचूर्णमुनु उप्पुनु चेर्चि तिनि कोंचेमु वेडिनीळ्लनु त्रागवलयुनु. इय्यदि प्राचीनमुलगु वृद्धुलनुगूडा बोगोट्टुनु. सरलमु अगुरु कोष्ठु देवदारुवु शोंठि वीटिनि गोमूत्रमु गंजितो चेर्चि त्रागिन वापु नशिंचुनु. करक्कायल कल्कमुनु आमदमुतो वेच्चचेसि पिप्पळ्लु सैन्धवलवणमुलनु चेर्चिकॊनि सेविंचिनचो वृद्धिरोगमुलु नशिंचुनु.