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चन्दायन (मुल्ला दाऊद - प्राचीनतम अवधी सूफी-प्रेमाख्यान सटीक)

चन्दायन (मुल्ला दाऊद - प्राचीनतम अवधी सूफी-प्रेमाख्यान सटीक)

Chandayan of Mulla Daud with Hindi Commentary

मुल्ला दाऊद (१३७९ ई.) / डॉ. परमेश्वरीलाल गुप्त द्वारा

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बरतेंगे। हम भारत (द्यूत प्रश्न) मेल्लो यदि उन्होंने उसकी पूर्ति न की तो हम उनके सग निकाह हरगिज नही करेंगे। फिर उसने बसौधीको बारात देखनेको भेजा। बसौधीको आते देख संवरू दूबेसे बोला— अगोरीकाकी बड़ी चर्चा सुनी है। यहाँका राजा मलयसिह बलवान् है। न मालूम किस ढगसे वह युद्ध करता है कि वह सब बारातियोंको मारकर बहुके डोलेको छीन लेता है और अपने रनिवासमें ले जाकर उसे अपनी रानी बना लेता है। अगोरीवाकी स्थिति अभी तक मेरी समझमें नहीं आयी। सामनेसे एक बाम्हन आ रहा है। यदि आप कहें तो उसे बारातमें घुसने न दिया जाय। यदि उसने बारातमें घुसकर बारातको फाड डाला तो पीछे उसके मारने से क्या लाभ होगा। यह सुनकर काकाने कहा— बात तो ठीक है। वह बारातमें घुसने न पावे। आज्ञा पाते ही सँवरूने एक ताड़का पेड़ उखाड लिया और उसे भूमिपर पटक दिया—जिससे वह फटकर चॅवर सरीखा बन गया। उसे इतने जोरसे घुमाया कि उसकी हवा जब बाम्हनको लगी तो वह गशखाकर मनियारके दरवाजेपर वापस जा पहुँचा। बोला—मै आपकी बारात देखने न जाऊँगा। बारातवाले आदमी नहीं जान पड़ते। उन्होंने तो ताडका पेड उखाडकर रख छोड़ा है। यह सुनकर महरा ने शिवचन्दसे कहा—यह लोग तो असुर जान पडते हैं। अपनी बारातके प्रति मै पहलेसे ही सजग हूँ। जबतक कोई जानकार नहीं जायेगा तब तक वे किसीको भीतर नहीं घुसने देंगे। इसलिए तुम नाई और पण्डित तीनो आदमी जाओ। विवाहका तो कोई प्रबन्ध अभी हुआ नहीं है। इसलिए पण्डितजीसे कहना कि वह अहीरको समझा दें कि लग्नका दिन निश्चय करनेमें गड़बड़ी हो गयी। अभी सात दिन और सात रात मज़ा है इसलिए तबतक वह अपनी बारात ठहराय। रसद पानी जो भी कहेंगे वह सब हम इकट्ठा कर देंगे। इस बीच बारातका जो प्रबन्ध करना होगा कर लिया जायगा। उधर मलयसिह अगोरीवाले बारात भगानेका उपाय रचने लगा। उसने गाँव भरके लड़कोंको बुलाकर समझा दिया। लड़कोंने शह पाकर अपनी काँछमे इटोंके टुकड़े इकट्ठे कर लिये और बारातके निकट पहुँचकर विखर गये और लगे ईंट फेंकने। सँवरूने देखा कि लड़के बारातियोंको ईंटोंसे मारकर परेशान कर रहे हैं तो उसने अपने ताडवाला झाड़ू उठाया। यह देख लड़के भाग खड़े हुए। मलयसिंहने तब महराके पास सदशा भेजा कि अहीरकी बारातमें जितने हुड़दंगे हों उन सबको निकाल बाहर करो अन्यथा विवाहके हर्पमे विषाद उत्पन्न हो जायेगा। यह सुनकर महरा सोचने लगा कि राजा किसी तरह मेरी इज्जत रहने नहीं देना चाहता। दुविधामें पड़कर बोला—राजा बलवान् है उसकी बात तो माननी ही होगी। शिवचन्द पण्डित और नाई तीनों बारातकी ओर चले। शिवचन्दके आते ही दैवन्दने उठकर प्रणाम किया और फिर कुशल क्षेमकी बात होने लगी। इस बीच

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