छत्रपति संभाजी महाराज (धर्मवीर स्वराज्य-रक्षक एवं मुग़ल-प्रतिरोध सम्पूर्ण इतिहास)
Chhatrapati Sambhaji Maharaj Comprehensive Historical Biography
कमल गोखले / ऐतिहासिक शोध मण्डल द्वारा
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संदर्भ में पढ़ेंबादशाह से आपकी जान को खतरा है। इस प्रकार की सूचना मुगलों के मिरज और रहिमतपुर की चौकियों पर पहुँच गयी है। आप किसी भी समय कैद हो सकते हैं। जाल को तोड़ दीजिए और पक्षियों की तरह उड़ान भरिए।" शम्भूमहाराज निकल भागने के लिए मौका ढूँढ़ रहे थे। किन्तु दिलेरखान गत दिन उनके आसपास ही घूमता रहता था। एक दिन दोपहर को उसने युवराज से स्पष्ट शब्दों में कहा, "शम्भू महाराज ! हमें आपके झंडे के नीचे पन्हाला जीतना है।" खान की धूर्तता को शम्भूमहाराज समझ रहे थे। उन्होंने खिन्नता से कहा, "इसका मतलब ! तुमको मुझे आगे करके भूपालगढ़ की तरह पुनः लड़ाई करवानी है। हमारे प्रदेश में ले जाकर मुझे बदनाम करना है।" शम्भू महाराज को अपनी बगल में दबोचे दिलेरखान पन्हाला की ओर जाने की ज़िद कर रहा था। उसी समय गुप्त जासूसों ने युवराज को सूचित किया- "दो साल पहले इसी दिलेरखान ने वाडकर पिता-पुत्र को मित्र बनाया था। पंचमी के त्योहार के दिन रायगढ़ में दंगा फसाद करके शिवाजी महाराज की जान लेने की योजना बनायी थी। उस पर विश्वास करना एक गुनाह ही है। खान ने अभी तक शराफत का नकाब पहना हुआ था। किन्तु इन दिनों उसके भीतर छुपा हुआ शैतान उसे चुप नहीं बैठने दे रहा था। उसने फौज के रास्ते में पड़ने वाले टिकोटा और अथणी गाँवों पर गधे का हल चलवा दिया था। वास्तव में इन दोनों गाँवों में हिन्दुओं की अपेक्षा मुसलमान ही अधिक बसे थे। उनका केवल यह गुनाह था कि वे बीजापुर की सीमा में रहने वाले थे। "दिलेरखान ने भयानक अत्याचार किये। उसने दुकानें लूटीं और व्यापारियों को नंगा किया। सारे खेत जला दिये। किन्तु इतने से भी उसकी भूख नहीं मिटी। दिलेर दुष्ट सैनिकों ने हिन्दू और मुसलमान दोनों धर्म की लड़कियों में कोई भेद नहीं किया। दिन दहाड़े उनकी इज्जत लूटी। बहुत सी महिलाओं को बेइज्जत करके मार डाला। उनके शव पेड़ों पर लटकाए। अनेक माँ बहनों ने भरे हुए कुओं का आश्रय लिया और अपनी जीवन-लीला समाप्त कर दी।" दिलेरखान के इस क्रूर अत्याचार से बहुत से मुसलमान भी सहम गये थे। किन्तु खान के विरोध में खड़े होने की उनमें हिम्मत न थी। उन सभी लोगों ने एक साथ मिलकर शम्भूमहाराज से शिकायत की। पहले से ही नाराज शम्भूमहाराज क्रोधावेश में पैर पटकते हुए दिलेरखान की छावनी में गये। उन्होंने डाँटते हुए उससे पूछा- "आप इनसान हैं या हैवान ? गरीब प्रजा पर इस तरह का अत्याचार आप कर कैसे पाते हैं?" "शम्भूशहजादे ! हो गया न यकीन ? हम सिर्फ हिन्दुओं का ही गला नहीं सम्भाजी 141