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छत्रपति संभाजी महाराज (धर्मवीर स्वराज्य-रक्षक एवं मुग़ल-प्रतिरोध सम्पूर्ण इतिहास)

छत्रपति संभाजी महाराज (धर्मवीर स्वराज्य-रक्षक एवं मुग़ल-प्रतिरोध सम्पूर्ण इतिहास)

Chhatrapati Sambhaji Maharaj Comprehensive Historical Biography

कमल गोखले / ऐतिहासिक शोध मण्डल द्वारा

DevanagariHindipublished793 पृष्ठ

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"उस बन्दे को गलतफहमी तो नहीं हो गयी है कि फिरंगियों की अव्वल दर्जे की तोपों का वह मुकाबला कर लेगा।" असदखान ने हँसकर कहा। वजीर की इस प्रतिक्रिया पर सभी सरदार हँस पड़े, किन्तु बादशाह कुछ अधिक गम्भीर हो गया। ऐसा लगा कि उसे शत्रु की हिम्मत और शक्ति का ठीक- ठीक अन्दाजा था। इसीलिए उसने अपनी अनेक रातें चिन्ता में जागकर बितायीं। उसने एक जोखिम भरी योजना बनाई। इस योजना की रूपरेखा अपने सहयोगियों के सामने स्पष्ट करते हुए बादशाह ने कहा, "सम्भा ने फिरंगियों से सम्बन्ध बिगाड़ लिया है। उसका एक पाँव फिरंगियों के जबड़े में फँस गया है। ऐसे में हम दूसरी ओर हमला करेंगे। हमारा एक गाजी चालीस-पचास हजार की फौज लेकर निकलेगा। कोल्हापुर, बेलगाँव की ओर से रामदरिया घाट पार करेगा और दक्षिण कोंकण पर हमला बोल देगा।" "लेकिन हुजूर ?" असदखान अपना आधा ही मुँह खोल पाया था। "हाँ बोलो वजीरे ?" "इतनी बड़ी फौज के खाने पीने की व्यवस्था कैसे होगी ? उन्हें रसद कौन पहुँचाएगा ?" "वाह असदखान, आपकी यह चिन्ता शाहंशाह के वजीर के लिए उचित ही है। मगर इसका भी इन्तजाम हमने कर लिया है। हमारा सूरत का सूबेदार रसद से भरी जहाजों को गुजरात के किनारे से भेजेगा। ये जहाजें अरब सागर से मुम्बई, जंजीरा, राजापुर होते हुए पणजी की ओर बढ़ेंगी।" "लेकिन जहाँपनाह, समुद्रतट पर शिवाजी और सम्भाजी द्वारा बनाए गये अनेक जलदुर्ग और नौसेना की चौकियाँ हैं।" "उनकी नौसेना का मुकाबला करने की शक्ति हमारी नौसेना में निश्चित रूप से है। इसके अतिरिक्त हमारी मदद करने के सिवा फिरंगियों के पास भी कोई दूसरा उपाय नहीं है।" बादशाह की इस योजना को सुनकर अनुभवी और बुजुर्ग सरदारों ने अपनी गर्दनें हिलाईं। किन्तु जुल्फिकार लम्बी साँसें छोड़ने लगा। बादशाह ने उसकी सशंक आँखों को देखा। "बोलो जुल्फिकार तुम्हारा शक क्या है?" "जहाँपनाह आपका मनोबल बुलन्द है। पर रामदरिया गोवा की ओर से हमारी इतनी बड़ी फौज घुसेगी तो सम्भा वहाँ से भागकर सीधा अपने रायगढ़ के पहाड़ी गर्भगृह में जा घुसेगा, उसका क्या करना ?" बादशाह मुस्कराया फिर नक्शे पर उँगली दिखाते हुए कहने लगा, "उसी समय दूसरा गाजी दूसरी फौज लेकर कल्याण और पनवेल से होता हुआ रागयगढ़ सम्भाजी :. 457