छत्रपति संभाजी महाराज (धर्मवीर स्वराज्य-रक्षक एवं मुग़ल-प्रतिरोध सम्पूर्ण इतिहास)
Chhatrapati Sambhaji Maharaj Comprehensive Historical Biography
कमल गोखले / ऐतिहासिक शोध मण्डल द्वारा
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संदर्भ में पढ़ेंगोले की दक्षिणी दिशा को नदी का नाम दिया जाता है। कौड़ियों को इकट्ठा करके गोले में फेंकते हैं। सिपाहियों का विश्वास है कि जिस सिपाही की कौड़ी गोले में पड़ेगी, उसकी कब्र उसी नदी के किनारे बनेगी। क्या बताऊँ आलम पनाह? हमारी सारी फौज भयाक्रान्त है। हर एक भीतर ही भीतर तड़प रहा है। सभी एक दूसरे से पूछते रहते हैं कि 'हम गंगा-यमुना की ओर जिन्दा लौटेंगे या यहीं कहीं लावारिस की तरह हमारी लाश गिरेगी'?" "वजीर यह बात यहीं तक सीमित नहीं है। तुम्हारे फौजी यह भी जानने का खेल खेलते हैं कि बादशाह की कब्र कहाँ खोदी जाएगी? क्यों? बोलो! बोलो!!" हताश बादशाह व्यंग्यपूर्ण हँसी हँसकर बोला, किन्तु उसके क्रोध के पीछे जो वेदना थी उसे छुपा पाना सम्भव नहीं था। विषय को बदलते हुए बादशाह ने वजीर से पूछा, "वजीर, नासिक और बागलाण की क्या खबर है?" "जहाँपनाह, आपके वफादार महावतखान ने वहाँ पर बड़े जोश से काम किया है। त्र्यंबक के किले पर पिछले छह महीने से घेरा डाल रखा है। रसद का एक दाना भी किले पर नहीं पहुँच रहा है। किले पर मराठे भूख से छटपटा रहे हैं। दो दिनों में ही किला कब्जे में आ जाएगा।" इसी बीच बादशाह का तीस वर्षीय पोता मोमिन खान दौड़ते हुए आया और बड़े उत्साह से कहने लगा, "मुबारक हो जहाँपनाह। बहुत अच्छी खबर-" "क्यों, क्या हुआ?" अपने पोते पर दृष्टि खड़ाते हुए बादशाह ने पूछा, "ओ जहन्नमी सम्भा अल्लाह को प्यारा हुआ या पकड़ा गया?" "नहीं, नहीं, वैसा नहीं, लेकिन दादाजान-" पोता हकलाया। "वैसा नहीं तो तुरन्त अपना मुँह काला करके निकल जाओ। इस किले पर घेरा डाला, उस किले पर घेरा डाला, ऐसी बकवास अब बन्द करो। बेवकूफो, उस पापी शिवा और सम्भा के तीन सौ से भी अधिक किले हैं। तुम्हारी इन फिजूल की बातों को सुनते-सुनते जिन्दगी समाप्त हो गयी, शैतानो।" मोमिन खान उल्टे पैर भाग गया। क्रोधित बादशाह उखड़ते हुए फिर वजीर से बोला, "पाँच लाख की फौज और पिछले आठ-नौ वर्षों का समय? हमारे तैमूरवंश में बाबर हुए, अकबर, जहाँगीर, शाहजहाँ, इतने खुदा के बन्दे आकर गये। पिछले दो सौ वर्षों से हमने हिन्दुस्तान पर राज्य किया। परन्तु इस तरह की आठ- नौ वर्षों की जालिम लड़ाई देखी थी किसी ने?" "बादशाह सलामत थोड़ा धीरज धारण करें।" असदखान ने आत्मीयता से कहा। "वजीर, आपको मालूम नहीं, हमारी सारी फौज को पागल होना ही बाकी है। पिछले आठ वर्षों से हमारे सैनिकों को घर मकान, बाले-बच्चे, किसी भी बात 592 :: सम्भाजी