छत्रपति संभाजी महाराज (धर्मवीर स्वराज्य-रक्षक एवं मुग़ल-प्रतिरोध सम्पूर्ण इतिहास)
Chhatrapati Sambhaji Maharaj Comprehensive Historical Biography
कमल गोखले / ऐतिहासिक शोध मण्डल द्वारा
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संदर्भ में पढ़ेंने राजाराम और ताराबाई को एक बड़े झाबे में बैठने की आज्ञा दी। साथ में कुछ सैनिक भी जाने वाले थे। येसूबाई ने चिन्तित स्वर में कहा; "समय एकदम नष्ट न करो। चलिए पहले बाहर निकलिए। अपने किले में अभी भी अनेक स्थलों पर किलेबन्दी बची हुई है। उसी ओर भागिए। अपनी जान बचाइए, राज्य बचाइए, लड़ते रहिए।" "किन्तु भाभी जी आप?" राजाराम ने कातर स्वर में पूछा। "नहींऽ दीदी आपको भी हमारे साथ आना होगा। आप पीछे रह गयीं तो कैद हो जाएँगी।" ताराबाई हकलाते हुए बोली। उनकी आँखें अश्रुपूरित हो गयी थीं। "मैंने जानबूझकर कैद होने की तैयारी कर ली है। तुम दोनों जितनी जल्दी हो सके निकल जाओ। नहीं तो हम सभी कैद हो जाएँगे।" "मतलब?" "मेरे कैद होने में लाभ है। शम्भू महाराज के कुटुम्ब के बन्दी हो जाने के आनन्द से हमारा शत्रु दो-चार दिन के लिए ढीला पड़ जाएगा। उसी अवधि में आप दोनों खतरे की सीमा के पार निकल जाइए।" येसूबाई की असाधारण उदारता और अद्भुत बौद्धिक कौशल देखकर राजाराम और ताराबाई को बहुत आश्चर्य हुआ। वे रो पड़े। शत्रु की फौज रायगढ़ पर अधिकार करने के लिए रात में ही कूच कर चुकी थी उनका शोर अब पास ही सुनाई देने लगा था। हाथ ऊँचा करके महारानी से विदा लेने तक का अवसर राजाराम और ताराबाई को नहीं मिला। मजबूत रस्सियों में बँधे झाबे में बिठाकर वे नीचे छोड़ दिये गये। येसूबाई ने सन्तोष की साँस ली और थोड़ी देर के लिए अपनी आँखें मूँद लीं। मन ही मन जगदीश्वर का आभार माना। सोलह "बेवकूफ बादशाह, मौत हमें कबूल है किन्तु तुम्हारा धर्म स्वीकार करना नहीं। यह शिवपुत्र तुम्हारे मजहबी जाल में कभी भी फँसने वाला नहीं है।" सम्भाजी ने मुँहतोड़ उत्तर दिया। "मजहब के लिए मैं रुका भी नहीं हूँ।" औरंगजेब कुत्सित हँसी हँसते हुए बोला। 752 : सम्भाजी