छत्रपति संभाजी महाराज (धर्मवीर स्वराज्य-रक्षक एवं मुग़ल-प्रतिरोध सम्पूर्ण इतिहास)
Chhatrapati Sambhaji Maharaj Comprehensive Historical Biography
कमल गोखले / ऐतिहासिक शोध मण्डल द्वारा
पृष्ठ 80, कुल 793 में से
संदर्भ में पढ़ेंशम्भुराजा ने कर्णेश्वर मन्दिर में सपत्नीक जाकर दर्शन किया। युवराज ने नगर की बगल में एक कुछ ऊँची जगह देखी। इसके चारों ओर सुपारी और नारियल के पेड़ थे। पीछे ही ओर पास ही कल कल निनादनी नदी थी। चारों ओर पहरेदारों की तरह खड़े घने वृक्षों से घिरी यह हरी पहाड़ी थी। शम्भुराजा ने कहा, "कविराज, यह जगह मुझे बहुत पसन्द आयी है। यहीं पर हमारे लिए एक सुन्दर सा घर बनवाइए। यहाँ पर प्रकृति का साहचर्य मिलेगा साथ ही गोवा और कोल्हापुर से आने वाले रास्ते की अच्छी निगरानी भी रख सकेंगे।" रात्रि भोजन के लिए युवराज को शृंगारपुर के महल में वापस जाना था। इसके लिए शम्भुराजा और येसूबाई ने पालकियों को छोड़कर मजबूत कद काठी वाले अरबी घोड़ों पर सवारी की। युवराज ने घोड़े की लगाम खींचकर शृंगारपुर की ओर दौड़ाया। उस समय अगल बगल ताड़वृक्षों से घिरी घाटियों और खाइयों में अँधेरा उतर रहा था। झरनों और नालों के बीच से राह दिखाने वाले मशालची आगे-पीछे दौड़ने लगे। शम्भुराजा नगर की सीमा पार कर रहे थे, उसी समय अचानक दो तीन सौ किसानों और कोलियों का झुंड युवराज के रास्ते में आकर खड़ा हो गया। तभी संगमेश्वर में नियुक्त पहरेदारों ने 'चलो ! पीछे चलो, पीछे हटो।' कहकर उन्हें ढकेलना आरम्भ किया। किन्तु उसी समय 'ओ युवराज, ओ मालिक, ओ माई बाप, थोड़ा रुक जाओ' ऐसी चीख युवराज के कानों में पड़ी। इस व्याकुल और आर्त चीख को सुनते ही युवराज ने अपने घोड़े की लगाम खींचकर उसे पीछे की ओर घुमाया। युवराज को रुकता देखकर, पहरेदारों के बिना कोई चिन्ता किये, उन गरीब श्रमजीवियों ने चीखना-चिल्लाना शुरू किया- "माई बाप, सरकार हमको बचाओ।" संभाजी राजा को किसी गम्भीर प्रसंग की आशंका हुई। वे घोड़े से उतर गये। उनके पीछे कवि कलश भी घोड़े से उतरे। उन दोनों को किसानों ने घेर लिया। एक बूढ़ा किसान दहाड़ मारकर चिल्लाया- "माई बाप, सरकार, हम कैसे जियें ? ये जप्ती के हुकुमनामे देखिये।" "किसने भेजे हैं इन्हें ?" "देखिये सीधे रायगढ़ से आये हैं।" दुबले पतले दो तीन किसान एक साथ बोल पड़े। "कविराज देखिए तो इसमें जरूर कुछ गड़बड़ है।" शम्भुराजा व्यग्र होकर बोले, "यहाँ प्रभावली की सूबेदारी महाराज ने मुझे दी है। ऐसी स्थिति में बिना मुझसे पूछे ये हुकुमनामे रायगढ़ से कैसे आये ?" 78 :: सम्भाजी