सन्त दादू दयाल वाणी (सन्त दादू दयाल जी - सम्पूर्ण साखी एवं पद सटीक)
Sant Dadu Dayal Vani with Hindi Commentary
सन्त दादू दयाल जी द्वारा
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संदर्भ में पढ़ेंश्री दादूवाणी-राग गौड़ी 1 67. परिचय हैरान । नटताल ऐसो खेल बन्यो मेरी माई, कैसे कहूँ कछु जान्यो न जाई ॥ टेक ॥ सुर नर मुनिजन अचरज आई, राम-चरण को भेद न पाई ॥ 1 ॥ मंदिर माहिं सुरति समाई, कोऊ है सो देहु दिखाई ॥ 2 ॥ मनहिं विचार करहु ल्यौ लाई, दिवा समान कहाँ ज्योति छिपाई ॥ 3 ॥ देह निरंतर शून्य ल्यौ लाई, तहं कौण रमे कौण सूता रे भाई ॥ 4 ॥ दादू न जाणै ये चतुराई, सोइ गुरु मेरा जिन सुधि पाई ॥ 5 ॥ 68. निज घर परिचय । पंचम ताल भाई रे घर ही में घर पाया । सहज समाइ रह्यो ता मांही, सतगुरु खोज बताया ॥ टेक ॥ ता घर काज सबै फिर आया, आपै आप लखाया । खोल कपाट महल के दीन्हें, स्थिर सुस्थान दिखाया ॥ 1 ॥ भय औ भेद भरम सब भागा, साच सोई मन लाया । पिंड परे जहाँ जिव जावै, ता में सहज समाया ॥ 2 ॥ निश्चल सदा चलै नहिं कबहुँ, देख्या सब में सोई । ताही सौं मेरा मन लागा, और न दूजा कोई ॥ 3 ॥ आदि अनन्त सोई घर पाया, अब मन अनत न जाई । दादू एक रंगै रंग लागा, तामें रह्या समाई ॥ 4 ॥ 69. मानस तीर्थ । पंचम ताल इत है नीर नहावन जोग, अनत हि भ्रम भूला रे लोग ॥ टेक ॥ तिहिं तट न्हाये निर्मल होइ, वस्तु अगोचर लखै रे सोइ ॥ 1 ॥ सुघट घाट अरु तिरबो तीर, बैठे तहाँ जगत-गुरु पीर ॥ 2 ॥ दादू न जाणै तिन का भेव, आप लखावै अंतर देव ॥ 3 ॥
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