सन्त दादू दयाल वाणी (सन्त दादू दयाल जी - सम्पूर्ण साखी एवं पद सटीक)
Sant Dadu Dayal Vani with Hindi Commentary
सन्त दादू दयाल जी द्वारा
पृष्ठ 367, कुल 504 में से
संदर्भ में पढ़ेंश्री दादूवाणी-राग मारू 7 आदैं अन्तैं तेज तुम्हारो, दादू देखे गाये रे ॥ 3 ॥ 154. (गुजराती भाषा) । शूल ताल तुम्ह सरसी रंग रमाड़ । आप अपरछन थई करी, मने मा भरमाड़ ॥ टेक ॥ मन भोलवे कांइ थई वेगलो, आपणपो देखाड़ । केम जीवूं हौं एकली, बिरहणिया नार ॥ 1 ॥ मने बाहिश मा अलगो थई, आत्मा उद्धार । दादू सूं रमिये सदा, येणे परें तार ॥ 2 ॥ 155. काल चेतावनी । तुरंग लील ताल जाग रे, किस नींदड़ी सूता, रैण बिहाई सब गई, दिन आइ पहूँता ॥ टेक ॥ सो क्यों सोवे नींदड़ी, जिस मरणा होवे रे । जोरा वैरी जागणा, जीव तूँ क्यों सोवे रे ॥ 1 ॥ जाके सिर पर जम खड़ा, शर सांधे मारे रे । सो क्यों सोवे नींदड़ी, कहि क्यूं न पुकारे रे ॥ 2 ॥ दिन प्रति निशि काल झंपै, जीव न जागे रे । दादू सूता नींदड़ी, उस अंग न लागे रे ॥ 3 ॥ 156. तुरंग । लील ताल जाग रे सब रैण बिहाणी, जाइ जन्म अंजलि को पाणी ॥ टेक ॥ घड़ी घड़ी घड़ियाल बजावै, जे दिन जाइ सो बहुरि न आवै ॥ 1 ॥ सूरज चंद कहैं समझाइ, दिन दिन आयु घटती जाइ ॥ 2 ॥ सरवर पाणी तरवर छाया, निशिदिन काल गिरासै काया ॥ 3 ॥ हंस बटाऊ प्राण पयाना, दादू आतम राम न जाना ॥ 4 ॥
- 367 -