भारतकोश
ध्वन्यालोक (आचार्य आनन्दवर्धन - लोचन टीका एवं आचार्य जगन्नाथ पाठक सविस्तार हिन्दी व्याख्या)

ध्वन्यालोक (आचार्य आनन्दवर्धन - लोचन टीका एवं आचार्य जगन्नाथ पाठक सविस्तार हिन्दी व्याख्या)

Dhvanyaloka of Anandavardhana with Abhinavagupta Locana and Hindi Commentary

आचार्य आनन्दवर्धन द्वारा

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पृष्ठ 387

तृतीय उद्योतः ३२७

ध्वन्यालोकः
तेन ध्वनेः प्रभेदेषु सर्वेष्वेवास्ति रम्यता ॥
विच्छित्तिशोभिनैकेन भूषणेनेव कामिनी ।
पदद्योत्येन सुकवेर्ध्वनिना भाति भारती ॥'
इति परिकरश्लोकाः ॥ १ ॥
( यस्त्वलक्ष्यक्रमव्यङ्ग्यो ध्वनिर्वर्णपदादिषु ।
वाक्ये सङ्घटनायां च स प्रबन्धेऽपि दीप्यते ॥ २ ॥
जिस प्रकार कामिनी विशेष शोभा वाले (विच्छित्तिशोभिना) एक ही आभूषण
से शोभित होने लगती है उसी प्रकार सुकवि की वाणी पद से द्योतित होने वाली
ध्वनि से शोभित होने लगती है ।
ये परिकर-श्लोक हैं ॥ १ ॥
परन्तु जो अलक्ष्यक्रमव्यङ्ग्य ध्वनि वर्ण, पद आदि में होता है वह वाक्य में,
संघटना में और प्रबन्ध में भी दीप्त होता है ॥ २ ॥
लोचनम्
वहति तेन हेतुना सर्वेषु प्रकारेषु निरूपितस्य पदमात्रावभासिनोऽपि पदप्रका-
शस्यापि ध्वने रम्यतास्ति स्मारकत्वेऽपि पदानामिति समन्वयः । अपिशब्दः
काकाक्षिन्यायेनोभयत्रापि सम्बध्यते । अधुना चारुत्वप्रतीतौ पदस्यान्वयव्य-
तिरेकौ दर्शयति—विच्छित्तीति ॥ १ ॥
एवं कारिकां व्याख्याय तदसङ्गृहीतमलक्ष्यक्रमव्यङ्ग्यं प्रपञ्चयितुमाह—
यस्त्विति । तुशब्दः पूर्वभेदेभ्योऽस्य विशेषद्योतकः । वर्णसमुदायश्च पदम् ।
तत्समुदायो वाक्यम् । सङ्घटना पदगता वाक्यगता च । सङ्घटितवाक्यसमुदायः
कारण इस प्रकार इष्ट अर्थ की स्मृति चारुत्व अर्पित करती है उस कारण सब प्रकारों
में निरूपित, पदमात्र से अवभासित होने वाले भी पदप्रकाश ध्वनि की रम्यता पदों
के स्मारक होने पर भी है, यह (श्लोकार्थ का) समन्वय है । 'भी' शब्द ('अपि' )
'काकाक्षिगोलक' न्याय (अर्थात् जिस प्रकार कौए का एक ही अक्षिगोल दोनों ओर का
काम करता है उस प्रकार) से दोनों ओर लगेगा । अब चारुत्व की प्रतीति में पद का
अन्वय-व्यतिरेक दिखाते हैं—विशेष शोभा (विच्छित्ति)—॥ १ ॥
इस प्रकार कारिका की व्याख्या करके उसके द्वारा असङ्गृहीत अलक्ष्यक्रमव्यङ्ग्य
का प्रपञ्च करने के लिए कहते हैं—परन्तु जो—। 'परन्तु' ('तु') शब्द पहले के प्रभेदों
से इसका विशेष द्योतक है, वर्णों का समुदाय 'पद' होता है, उन (पदों) का समुदाय
'वाक्य' होता है, संघटना पदगत और वाक्यगत होती है, संघटित वाक्यों का समुदाय