ज्ञानेश्वरी (भावार्थ दीपिका - मूल मराठी ओव्या व हिन्दी व्याख्या)
Dnyaneshwari / Bhavarth Deepika with Hindi Commentary
संत ज्ञानेश्वर महाराज द्वारा
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संदर्भ में पढ़ेंअकारादि क्रमसे ज्ञानेश्वरीकी विषय-सूची क्रमांक विषय पृष्ठ क्रमांक विषय पृष्ठ कृतज्ञता के कुछ शब्द १ १ अक्रोध ६३६ ज्ञानेश्वर और ज्ञानेश्वरी ५ २ अक्षर पुरुषका वर्णन ६१५ ज्ञानेश्वरी विषयसूची २३ ३ अखंड सम चित्तता ४७९ अभ्यासार्थ विषय विश्लेषण ३७ ४ अगले अध्यायकी भूमिका १०५ ज्ञानेश्वरी ५ अज्ञान ३४७ १ अर्जुन-विषाद-योग १ ६ अज्ञानका रूप ५९७ २ सांख्य-योग ३२ ७ अज्ञानके लक्षण ६८४ ३ कर्म-योग ७६ ८ अज्ञानावृत्त प्रकाशही क्षेत्रज्ञ है ५६८ ४ ज्ञान-कर्म संन्यासयोग १०६ ५ कर्म-संन्यास-योग १३२ ९ अठारहवा अध्याय एकाध्यायी गीता है ७१७ ६ आत्म-संयमयोग १५२ ७ ज्ञानविज्ञानयोग २०० १० अदंभका विवेचन ३५७ ८ सातत्ययोग २२२ ११ अद्वैतमें क्रिया कर्म नहीं होता ९ समर्पणयोग २४९ किंतु भक्ति होती है ८१२ १० विभूति-चिंतनयोग २९८ १२ अद्रोह ६५२ ११ विश्व-रूप-दर्शनयोग ३३२ १३ अधिकार भेदसे उपदेश भिन्नता ७९ १२ भक्तियोग ४०५ १३ क्षेत्रक्षेत्रज्ञयोग ४२९ १४ अध्यात्मज्ञानके बिना सब व्यर्थ ४९९ १४ गुणोत्कर्ष-गुण-निस्तारयोग ५३१ १५ पुरुषोत्तम दर्शनयोग ५७१ १५ अध्यात्मज्ञान ज्ञेय दर्शन ४८२ १६ देवासुर-संपद्विभाग-योग ६२५ १६ अनंत सूर्योंसे भी वह तेजस्वी रूप ३५३ १७ श्रद्धा-निरूपण-योग ६७० १८ सर्व-गीतार्थसंग्रह ईश्वर-प्रसाद-योग ७१० १७ अनहंकार ४७१ परिशिष्ट १८ अनन्य भक्तसे कहागया हृदयगूढ ८२९ १९ महारथियोंका परिचय १ २० कर्मयोगियोंका परिचय ४१ १९ अनादिसे ये दोनों मार्ग चले आये हैं ६४९ २१ विभूतियोंका परिचय ५५ २२ पौराणिक संदर्भ ८५ २० अनासक्त कर्मयोगीकी संन्यासावस्था ७९६ २३ विशेष शब्दोंका विशिष्ट अर्थ १०५ २४ कठिन शब्दकोश १९९ २१ अनासक्ति ४७९ २३