भारतकोश
गणेश गीता (गणेश पुराण क्रीड़ाखण्ड - राजा वरेण्य-गजानन संवाद सटीक)

गणेश गीता (गणेश पुराण क्रीड़ाखण्ड - राजा वरेण्य-गजानन संवाद सटीक)

Ganesha Gita from Ganesha Purana with Hindi Commentary

भगवान् गणेश / महर्षि वेदव्यास द्वारा

DevanagariHindipublished130 पृष्ठ

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भाषाटीकासमेत । (९९) हे राजन्!इस ज्ञानके विषयको मैं कहता हूं तुम श्रवण करो जिसके जाननेसे संसारसागरसे छूटकर मुक्त होजाओगे॥२६॥ यदनादीन्द्रियैर्हीनं गुणभुग्गुणवर्जितम् ॥ अव्यक्तं सदसद्भिन्नमिन्द्रियार्थावभासकम्॥२७॥ जो अनादि इन्द्रियरहित सतरजतमके गुणोंका भोक्ता, गुणवर्जित, अव्यक्त, सत्असत्से परे, इन्द्रियोंके विषयोंका प्रकाशक ॥ २७ ॥ विश्वभृच्चाखिलव्यापि त्वेकं नानेव भासते ॥ बाह्याभ्यन्तरतः पूर्णमसंगं तमसः परम् ॥२८॥ विश्वका धारण करनेहारा, सम्पूर्णमें व्यापक, एकही ब्रह्म अनेकरूपसे भासता है, वह बाह्य भीतरसे पूर्ण, असंग और अंधकारसे परे हैं ॥ २८ ॥ दुर्ज्ञेयं चादिसूक्ष्मत्वादीप्तानामपि भासकम् ॥ ज्ञेयमेतादृशं विद्धि ज्ञानगम्यं पुरातनम् ॥२९॥ अत्यन्त सूक्ष्म होनेसे वह जाना नहीं जाता, ज्योतियोंका भी प्रकाश करनेवाला है, इस प्रकार ज्ञानसे जानने योग्य पुरातन पुरुषको ज्ञेय ब्रह्म जानो ॥ २९ ॥