भारतकोश
श्रीगणेश पुराण (उपासना व क्रीडा खण्ड - गीताप्रेस विशेषाङ्क)

श्रीगणेश पुराण (उपासना व क्रीडा खण्ड - गीताप्रेस विशेषाङ्क)

Ganesha Purana Gita Press Special Edition

महर्षि व्यास द्वारा

स्रोत: Gita Press Gorakhpur · Gita Press Gorakhpur (उद्गम)

DevanagariSanskritpublished656 पृष्ठ

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विषयपृष्ठ-संख्याविषयपृष्ठ-संख्या
८३- पार्वतीको पुत्रकी प्राप्ति होनेपर हिमवान्‌का शिशुके दर्शनकेसुनाना, विश्वकर्माका प्रस्थान, उसी समय वृकासुर
लिये आना और उसे अनेक प्रकारसे आभूषणोंसे अलंकृतकरदैत्यका वहाँ आना, गुणेशद्वारा असुरका वध ........४९४
उसका 'हेरम्ब' यह नाम रखना, फिर हिमालयका प्रस्थान,९६- सातवें वर्षमें गुणेशका यज्ञोपवीत-संस्कार सम्पन्न
गृध्रासुरद्वारा बालक हेरम्बका हरणकर आकाशमें ले चलना,होना, यज्ञोपवीत-महोत्सवका वर्णन, उसी अन्तरालमें
पार्वतीका शोक, बालक हेरम्बद्वारा गृध्रासुरका वध .....४६५वहाँ आये कृतान्त तथा काल नामक दैत्योंका वध
८४- बालक हेरम्बकी बाल-लीलाद्वारा क्षेम, कुशल, क्रूरकरना, महर्षि कश्यप तथा अदितिद्वारा गुणेश्वरका
तथा बालासुर आदि दैत्योंके वधका आख्यान ...........४६७पूजन, देवताओंद्वारा बालक गुणेश्वरकी महिमाका
८५- महर्षि मरीचिका पार्वतीपुत्रका दर्शन करनेके लिये आना,प्रतिपादन ................................................................४९८
मरीचिद्वारा देवी पार्वतीसे विनायकके परब्रह्मस्वरूपका९७- माता कद्रूका अपने पुत्र शेषनागके पास पातालमें जाना
प्रतिपादन, बालककी रक्षाके लिये महर्षिका गणेशकवचऔर विनता तथा गरुड़द्वारा हुए अपने अपमानका बदला
बतलाना, गणेशकवचका माहात्म्य तथा उसकी उपदेश-लेनेके लिये कहना, वासुकि आदि नागों तथा गरुड़
परम्परा ................................................................४७०आदि पक्षियोंका घनघोर युद्ध, नागोंद्वारा विनता और
८६- गौतम आदि महर्षियोंद्वारा पार्वतीपुत्रका भूमि-उपवेशन नामकउनके पुत्रोंको बन्धनमें डालना, विनताद्वारा मुनि कश्यपको
संस्कार सम्पन्न किया जाना, बालकके वधकी इच्छासेअपना दुःख निवेदित करना और कश्यपद्वारा उसे एक
व्योमासुरका वहाँ आना, बालकद्वारा व्योमासुरका वध...४७२अभेद्य अण्डकी उत्पत्तिका आश्वासन देना ...............५०२
८७- बालक विनायकद्वारा शतमाहिषा नामक राक्षसी और९८- आठवें वर्षमें गुणेश्वरद्वारा विचित्र दैत्यका वध और
कमठासुरका वध, इस आख्यानके श्रवण और श्रावणकाविनताके गर्भसे उत्पन्न अण्डका भेदन, उसमेंसे मयूर
माहात्म्य ................................................................४७४नामक पक्षीका प्राकट्य, विनताद्वारा गुणेश्वरकी स्तुति,
८८- आठवें मासमें बालक गुणेशद्वारा किये गये तल्पासुरगुणेश्वरका मयूरको अपना वाहन बनाना और मयूरेश्वर
एवं दुन्दुभि नामक दैत्योंके वधका आख्यान ...........४७७नामसे प्रसिद्ध होना ..................................................५०५
८९- दसवें मास तथा ग्यारहवें मासकी अवस्थामें बालक९९- नौवें वर्षमें गुणेश्वरका बालकोंके साथ जलक्रीडा
गुणेशद्वारा किये गये आजगरासुर तथा शलभासुरकरना, गुणेशद्वारा अश्वरूपी दैत्यका वध, नागकन्याओंका
नामक दैत्योंके वधकी कथा ..................................४७९गुणेशको नागलोक ले जाना, भगासुर
९०- बालक गुणेशके द्वारा बारहवें मासमें नूपुर तथानामक दैत्यके वधकी कथा ..................................५०७
अविपुत्र नामक दैत्योंका वध ...................................४८११००- नागलोकमें नागकन्याओंद्वारा मयूरेश्वरका स्वागत-सत्कार,
९१- बालक गुणेशद्वारा कूट तथा मत्स्य आदि रूप धारणनागराज वासुकिको मयूरेश्वरद्वारा आभूषणके रूपमें धारण
करनेवाले दैत्योंके वधकी लीला-कथा ....................४८४करना, सर्पों तथा मयूरका युद्ध, शेषनागको आभूषणके रूपमें
९२- चार वर्षकी अवस्थावाले बालक गुणेशके द्वारा दैत्यधारण करना, शेषनागद्वारा मयूरेशकी स्तुति, शेषनागद्वारा
कर्दमासुरका वध, गुणेशद्वारा माता पार्वतीको अपनेसम्पाती आदिको बन्धन-मुक्त करना, मयूरेश्वरका नागलोकसे
मुखके भीतर समस्त विश्वका दर्शन कराना, माताद्वाराधरतीपर आना, भगासुरसे बालकोंको मुक्त कराकर वापस
गुणेशकी स्तुति ........................................................४८७घरमें आना और अपनी माया दिखाना .......................५११
९३- गुणेशके पाँचवें वर्षमें खड्गासुरका ऊँटका रूप बनाकर१०१- मयूरेश्वरद्वारा दसवें वर्षमें दैत्य कमलासुरकी सेनाका
तथा चंचल दैत्यका छायाका रूप धारणकर गुणेशकीवध, मरे हुए सैनिकोंका मयूरेश्वरकी कृपासे मुक्ति
बालमण्डलीमें आना, गुणेशद्वारा लीलापूर्वक उनकाप्राप्त करना ..............................................................५१४
वध करना .............................................................४९०१०२- दैत्य कमलासुर और मयूरेश्वरके युद्धका वर्णन ......५१६
९४- मुनिबालकोंके साथ गुणेशका महर्षि गौतम तथा१०३- कमलासुर और मयूरेशका भीषण युद्ध, कमलासुरके
अहल्याके आश्रममें जाकर ओदन-क्रीडा करना,रक्तबिन्दुओंसे अनेक दैत्योंकी उत्पत्ति, देवी सिद्धि-
पार्वतीद्वारा गुणेशको बन्धनमें डालना तथा उनकीबुद्धिकी सेनाके सैनिकोंद्वारा उन असुरोंका भक्षण,
मायासे मोहित होना, महर्षि गौतमद्वारा अहल्यासेमयूरेश्वरद्वारा कमलासुरका वध और मुनिगणोंद्वारा की
गुणेश्वरकी भगवत्ताका वर्णन ................................४९२गयी मयूरेश्वर-स्तुति .............................................५१८
९५- गुणेशके छठे वर्षमें विश्वकर्माका उनके दर्शनके लिये१०४- ब्रह्माजीद्वारा मयूरेशकी स्तुति, स्तुतिका माहात्म्य,
पार्वतीके पास आना, विश्वकर्माका पार्वतीकी स्तुति'कमण्डलुभवा' नामक नदीका प्राकट्य, मयूरेशकी
करना, पार्वतीका उन्हें भक्तिका वर देना, विश्वकर्माद्वारामायासे ब्रह्माका मोहित होना, मयूरेशकी परीक्षाके
गुणेशका स्तवन और उन्हें अंकुश आदि आयुध प्रदानलिये ब्रह्माद्वारा सृष्टिका तिरोधान, मयूरेशद्वारा पुनः
करना, गुणेशके द्वारा आयुधोंकी प्राप्ति कहाँसे हुई-सृष्टि कर लेना और ब्रह्माजीको अपने विश्वरूपका
इस जिज्ञासापर विश्वकर्माका सूर्य तथा संज्ञाकी कथादर्शन कराना ..........................................................५२०
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