भारतकोश
गीतावली (गोस्वामी तुलसीदास - गीताप्रेस सम्पूर्ण ७ काण्ड सान्वय सटीक)

गीतावली (गोस्वामी तुलसीदास - गीताप्रेस सम्पूर्ण ७ काण्ड सान्वय सटीक)

Gitavali of Goswami Tulsidas with Gita Press Commentary

गोस्वामी तुलसीदास द्वारा

DevanagariHindipublished454 पृष्ठ

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पृष्ठ 227

२२१ अयोध्याकाण्ड लोने नख-सिख, निरुपम, निरखन जोग, बड़े उर-कंधर बिसाल भुज बर हैं। लोने लोने लोचन, जटनिके मुकुट लोने, लोने बदननि जीते कोटि सुधाकर हैं॥ २॥ लोने लोने धनुष, बिसिख कर कमलनि, लोने मुनिपट, कटि लोने सरघर हैं। प्रिया प्रिय बंधुको दिखावत बिटप, बेलि, मंजु कुंज, सिलातल, दल, फूल, फर हैं॥ ३॥ ऋषिनके आश्रम सराहें, मृग-नाम कहैं, लागी मधु, सरित भरत निरझर हैं। नाचत बरहि नीके, गावत मधुप-पिक, बोलत बिहंग, नभ-जल-थल-चर हैं॥ ४॥ प्रभुहि बिलोकि मुनिगन पुलके कहत, भूरिभाग भये सब नीच नारि-नर हैं। तुलसी सो सुख-लाहु लूटत किरात-कोल, जाको सिसकत सुर बिधि-हरि-हर हैं॥ ५॥ श्रीलखनलाल और भगवान् राम बड़े ही सुन्दर हैं तथा सीताजी भी बड़ी ही सुघड़ हैं। ये सब महामनोहर चित्रकूटपर्वतपर कल्पवृक्षके नीचे बैठे हुए हैं। पीले और नीले कमलके समान इनके गोरे और साँवले शरीर हैं जो इस [चित्रकूटरूप] काम-सरोवरके मानो प्रेम, रूप और शोभामय कमल ही हैं॥ १॥ ये नखसे सिखतक सुन्दर अनुपम और दर्शनीय हैं। इनके वक्षःस्थल और कन्धे विशाल हैं तथा भुजाएँ अति सुन्दर हैं एवं इनके नेत्र तथा जटाओंके मुकुट भी बड़े ही मनोहर हैं। अपने मनोहर मुखमण्डलसे