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गीतावली (गोस्वामी तुलसीदास - गीताप्रेस सम्पूर्ण ७ काण्ड सान्वय सटीक)

गीतावली (गोस्वामी तुलसीदास - गीताप्रेस सम्पूर्ण ७ काण्ड सान्वय सटीक)

Gitavali of Goswami Tulsidas with Gita Press Commentary

गोस्वामी तुलसीदास द्वारा

DevanagariHindipublished454 पृष्ठ

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पृष्ठ 93

८७ बालकाण्ड धारण किये हैं । उनकी पेंजनी और किङ्किणीकी ध्वनि सुनकर मन आनन्दित होता है और सर्वदा उनके समीप रहता है ॥ १ ॥ भुजाओंमें सुन्दर पहुँची तथा अङ्गद (बिजायठ) धारण किये हैं, वक्षःस्थलपर पदिक और हार सुशोभित हैं तथा उनके कुण्डल और तिलककी छवि कविके हृदयमें गड़ी जाती है । सिरपर लाल टोपी है, नेत्रकमल अति विशाल हैं तथा मुख अति सुन्दर है । ऐसे रूपसे भगवान् कल्पवृक्षकी छायामें खड़े हुए हैं ॥ २ ॥ अनुज और अन्य बालकोंके सहित सर्वाङ्गसुन्दर भगवान् रामको नर-नारी इस प्रकार एकटक देखते रह जाते हैं जैसे हरिण दीपकको । इस प्रकार अवधकी गलियोंमें गोली, भँवरा, लट्टू और डोरीसे खेलती हुई प्रभुकी वह मधुर मूर्ति तुलसीदासके हृदयमें निवास करे ॥ ३ ॥ [ ४४ ] छोटिए धनुहियाँ, पनहियाँ पगनि छोटी, छोटिए कछौटी कटि, छोटिए तरकसी । लसत झँगूली झीनी, दामिनिकी छबि छीनी, सुंदर बदन, सिर पगिया जरकसी ॥ १ ॥ बय-अनुहरत बिभूषन बिचित्र अंग, जोहे जिय आवति सनेहकी सरक सी । मूरतिकी सूरति कही न परै तुलसी पै, जानै सोई जाके उर कसकै करक सी ॥ २ ॥ हाथोंमें छोटा-सा धनुष, पैरोंमें छोटी-छोटी जूतियाँ तथा कमरमें छोटी-सी कछनी और एक छोटा-सा तरकस सुशोभित है । [अति सुन्दर श्याम शरीरमें] पीले रंगकी महीन झँगुली है, जिसने मानों

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