गोभिल गृह्यसूत्रम् (सामवेद कौथुम-राणायनीय शाखा - मुकुन्द शर्मा सटीक)
Gobhila Grihyasutram of Samaveda with Commentary
महर्षि गोभिल (टीकाकार: पण्डित मुकुन्द शर्मा) द्वारा
पृष्ठ 270, कुल 332 में से
संदर्भ में पढ़ेंhyphen!
And before that: कर्त्तरि क्तान्तम् or कर्तृ क्तान्तम्?
Look at कर्तृ: क र् on तृ? No, it's कर्तृ (or कर्त्तरि).
Wait, क र् तृ क ा न् त म् -> कर्तृक्तान्तम्?
Wait, is there a ल? No.
Look at: कर्तृ - wait, does it say कर्तृ? Yes, क with र् on त and ृ under it: कर्तृ!
Wait, and then क्तान्तम्? It is क्तान्तम् without the loop? It looks like कान्तम् with a small ् or क्तान्तम्.
Wait, in line 26:
( १ ) अत्रोपसत्तिर्नाम पादोपसङ्ग्रहणम् । उपसन्न इति कर्तृक्तान्तम् । सीदतेर्गत्य-
Line 27:
र्थत्वात् "गत्यर्थाकर्मके" ( पा० ३।४।७२ ) त्यादिना क्तः ।
Footnote (२):
Line 28:
( २ ) वस्तुतस्त्वध्यापनं वेदस्य पुरःस्वयमधीत्य पश्चादन्तेवासिना सह पठने वदि-
Line 29: