गुरुकुल शिक्षा: भारत-पुनर्निर्माण
Gurukul Shiksha: Bharat Punarnirman
राजीव दीक्षित / रोबिन सिराना द्वारा
स्रोत: Swadeshi Shiksha Series · Swadeshi Robin Sirana · 2017 (उद्गम)
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संदर्भ में पढ़ेंदो व्यक्ति भारत की एक भाषा जानते हों और इस पर भी उनमें से कोई दूसरे को अंग्रेजी में पत्र लिखे ये एक-दूसरे से अंग्रेजी में बोले तो उसे कम से कम छः महीने की सख्त सजा दी जाएगी।।
-गांधी जी
(‘स्वभाषा लाओ, अंग्रेजी हटाओ’ पुस्तक से साभार)
जो शिक्षा हमें अच्छे-बुरे का भेद करना और अच्छे को ग्रहण करना तथा बुरे का त्याग करना नहीं सिखाती, वह शिक्षा सच्ची शिक्षा नहीं है।
-गांधी जी
जब मैं राष्ट्रपति बनकर यहाँ आया तो हिंदी, उर्दू और गुरुमुखी के अखबार पढ़ने की इच्छा हुई, लेकिन ये अखबार मुझे नहीं मिले। मुझसे यह कहा गया कि राष्ट्रपति भवन में केवल अंग्रेजी के अखबार आते हैं। मुझे बहुत तकलीफ हुई। आजाद भारत में राष्ट्रपति भवन में जब भारतीय भाषाओं का कोई स्थान नहीं तो देश की एकता कैसे रह सकती है?
-पूर्व राष्ट्रपति ज्ञानी जैलसिंह
कम पढ़े तो गाँव छोड़ दे, ज्यादा पढ़े तो देश छोड़ दे।
अमेरिका से लौटते समय पत्रकारों ने स्वामी विवेकानंद से पूछा- ‘अमेरिका की अमीरी देखने के बाद गरीबी से त्रस्त भारत के बारे में आप क्या सोचते हैं?’ स्वामीजी का जवाब इतिहास में अंकित हो गया – ‘अब तक मैं अपने देश की इज्जत करता था, लेकिन अब पूजा करूँगा।
गुरुकुल की शिक्षा जीवन-विज्ञान से जुड़ी थी। या यूं कहें कि मात्र जीवन का वैज्ञानिक स्वरूप ही विद्यार्थियों को सिखाया जाता