भारतकोश
हारीत संहिता (महर्षि आत्रेय-हारीत मुनि संवाद - सम्पूर्ण ६ स्थान सटीक)

हारीत संहिता (महर्षि आत्रेय-हारीत मुनि संवाद - सम्पूर्ण ६ स्थान सटीक)

Harita Samhita of Sage Harita with Hindi Commentary

महर्षि हारीत / आत्रेय मुनि द्वारा

DevanagariHindipublished548 पृष्ठ

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अ० ७ ] भाषाटीकासमेता । ( २५३ ) कफशूलवालोंको लंघन कराना, वमन कराना, पाचन औषध देना हित है, और कड़े पदार्थ, अत्यंत मीठा पदार्थ नहीं देवे और शयन नहीं करावे ॥ ४५ ॥ अथ बिल्वादिक्वाथ । बिल्वाग्निमन्थवृषाचित्रकनागराश्च एरण्डहिङ्गु सहसैन्धवकं समाशम् ॥ क्वाथः सदैव कफजं विनिहन्ति शूलं सद्यःकरोति जठरानलवर्द्धनं च ॥ ४६ ॥ बेलगिरी, अरणी, वांसा, चीता, सोंठ, अरंड, हींग, सैंधानमक इनको समान- भाग ले क्वाथ बना देनेसे शीघ्र ही कफसे उपजे शूलको दूर करता है और जठराग्निको बढ़ाता है ॥ ४६ ॥ अथ मातुलुङ्गादिरस । मातुलुङ्गरसं धात्रीरसं सैन्धवसंयुक्तम्॥ शोभाञ्जनकमूलस्य रसं च मरिचान्वितम् ॥४७॥ सक्षारमधुनोपेतं श्लेष्मशूलनिवार- णम् ॥ कृतक्षयोद्भवं कासं नाशयत्याश्वसंशयम् ॥ ४८ ॥ बिजौरेका रस, आंवलेका रस इनमें सैंधानमक मिला और सहजिनेकी जड़के रसमें काली मिर्च मिला ॥ ४७ ॥ फिर जवाखार, शहद, इनसे युक्त कर इनके देनेसे कफका शूल दूर होता है और क्षयरोगसे उपजीहुई खांसीको शीघ्रही नाशता है ॥ ४८ ॥ अथ तुवरादिचूर्ण । तुवरं ग्रन्थिकैरण्डा व्योषं पथ्याजमोदकम् ॥ सक्षारलवणोपेतं चूर्णं शूले कफात्मके ॥ ४९ ॥ सफेद शिरस, पीपलमूल, अरंड, सोंठ, मिर्च, पीपल, हरड़े, अजमोद, जवाखार, नमक इनका चूर्ण कफसे उपजे शूलको दूर करता है ॥ ४९ ॥ अथ एरंडादि क्वाथ । एरण्डबिल्वबृहतीद्वयमातुलुङ्ग-पाषाणभित्रिकटूमूलकृते कषाये॥ सक्षारहिङ्गुलवणाश्च सुतैलमिश्राः श्रोण्यंसमेढ्रहृदयस्तनकु- क्षिदेयम् ॥ ५० ॥ अरंड, बेलगिरी, दोनोंकटेहली, बिजौरा, पाषाणभेद, त्रिकटु, सोंठ, मिर्च, पीपल, इनसे कियेहुए क्वाथमें जवाखार, हींग, नमक, तेल इनको मिला फिर, कटि, कंधे, लिंग, हृदय, कुक्षी, चूंची, इन स्थानोंमें इसकी मालिस करनी चाहिये ॥ ५० ॥ Nepal Sanskrit University, Balmeeki Campus, Kathmandu