हर्षचरितम् (महाकवि बाणभट्ट - संकेत एवं जगन्नाथ पाठक सान्वय हिन्दी व्याख्या सटीक)
Harshacharitam of Mahakavi Banabhatta with Sanket and Hindi Commentary
महाकवि बाणभट्ट द्वारा
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संदर्भ में पढ़ेंनखमयूखजालकेन नूपुरव्याहाराहूतेर्भवनकलहंसकुलैर्ब्रह्मलोकनिवासिहृदयै- रिवानुगम्यमाना समं सावित्र्या गृहमगात् । अत्रान्तरे सरस्वत्यवतरणवार्तामिव कथयितुं मध्यमं लोकमवततारां- शुमाली । क्रमेण च मन्दायमाने मुकुलितविसिनीविसरव्यसनविषण्ण- सरसि वासरे, मधुमदमुदितकामिनीकोपकुटिलकटाक्षक्षिप्यमाण इव क्षेपीयः क्षितिधरशिखरमवतरति तरुणतरकपिलपनलोहिते लोकैक- चक्षुषि भगवति, प्रस्रुतमुखमाहेयीयूथक्षरत्क्षीरधाराधवलिते- ऽत्रासन्नचन्द्रोदयोद्दामक्षीरोदलहरीक्षालितेष्विव दिव्याश्रमोपशल्येषु, अपराह्णप्रचारचलिते चामरिणि चामीकरतटताडनरणितरदने रदति सुरस्रवन्तीरोधांसि स्वैरमैरावते, प्रसृतानेकविद्याधराभि- धोमुखीभवति । जालकं समूहः । व्याहार उक्तिः । मध्यमं लोकं भूमिम् । अंशुमाली रविः । क्रमेणेत्यादावस्मिन्सति सावित्री सरस्वतीमवादीदिति सम्बन्धः । विसरशब्द औणादिकः षण्डपर्यायः । मुदिताः सञ्जातमन्मथाः । कामिन्यः शृङ्गारिण्यः । सम्भोगान्तरायकारी कथमयमद्यापि नास्तमेतीत्यतः कोपः क्षिप्यमाणश्चातित्वरितं पतति । क्षेपीयस्तूर्णतरम् । लपनं वदनम् । लोकैत्यादिना सम्भोगविघ्नकारित्वमेव प्रकाश्यते । माहेयी गौः । उद्दामः प्रवृद्धिं गतः । उपशल्यं समीपम् । चामीकरं सुवर्णम् । रदना दन्ताः । रदति विलिखति । सुरस्रवन्ती गङ्गा । रोधस्तटम् । स्वैरं स्वेच्छम् । 'या दूतिका गमन- कालमपाहरन्ती सोढुं स्मरज्वरमरातिपिपासितेव । निर्याति वल्लभजनाधरपान- वाले लोगों के हृदय के समान भवन के कलहंस उसके नूपुरों की आवाज से बुलाये जाने पर उसका पीछा करने लगे । इसी बीच सूर्य मानो सरस्वती के अवतीर्ण होने या समाचार कहने के लिए मध्यमलोक ( भूलोक ) में उतरे । क्रमशः दिन मन्द पड़ने लगा । कमलिनी-समूह के मुकुलित होने के दुःख से सरोवर दुखी हो गए । मदिरा से मदमाती कामिनियों के क्रोध के कारण टेढ़े कटाक्षों द्वारा मानो फेंके जाने पर बड़ी शीघ्रता से तरुण वानर के मुँह के सदृश लाल वर्ण वाले संसार के एकमात्र नेत्र भगवान् सूर्य अस्ताचल के शिखर पर उतरने लगे । दिव्य आश्रमों के समीपवर्ती प्रदेश आर्द्र स्तनों वाली गौओं के झुण्ड से बहती हुई दूध की धारा से धवल हो रहे थे । मानो निकट में होने वाले चन्द्रोदय से बढ़े हुए क्षीरसागर की तरंगों द्वारा प्रक्षालित हो रहे हों । सन्ध्याकालीन भ्रमण के लिए निकला हुआ, चँवर धारण किये हुए