हिन्दू पद-पादशाही (मराठा साम्राज्य एवं हिन्दू पुनरुत्थान इतिहास)
Hindu Pad-Padashahi by Veer Savarkar
विनायक दामोदर सावरकर (वीर सावरकर) द्वारा
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को भी भलीभांति ज्ञात था कि यदि हम पश्चिमी समुद्र तट पर शिवाजी के समय से शान्तिपूर्वक आबाद हैं, तो इसलिये नहीं कि मरहठे हमसे प्रसन्न हैं या हमारा यहां पर रहना उन्हें पसन्द है, वरन् हम यहां शांति पूर्वक इसलिये पड़े हुये हैं कि इस समय मरहठे अपने शक्तिशाली शत्रुओं से लड़ने में उत्तरी भारतवर्ष में लगे हुये हैं और हमें एक 'साधारण शत्रु समझ कर इस समय कुछ ध्यान नहीं देते हैं। जिस समय हम सिर उठायेंगे, वे अवश्य हमारा सत्यानाश कर देंगे। इस के साथ ही अंग्रेज़ अपनी सूक्ष्म राजनैतिक अंतर्दृष्टि द्वारा यह भी भलीभांति समझते थे कि उन के अधीन जो बम्बई का प्रदेश है उसका कारण यह नहीं है कि वे मरहठों के गढ़ में उस पर अपना आधिपत्य रख सकते थे पर इसका एकमात्र कारण यह है कि मरहठे दूसरे स्थानों पर लड़ाई में उलझे होने के कारण इस ओर ध्यान नहीं देते। इसलिये वे भी हर समय मरहठों को हानि पहुंचाने की इच्छा करते हुये भी डर के मारे उनसे छेड़छाड़ नहीं करते थे। आंगरे की शक्ति को नष्ट करने के लिये नानासाहब उनकी शक्ति को काम में लाये थे, परन्तु यह भी इस शर्त पर कि इस कार्य द्वारा समस्त मरहठा जाति को किसी प्रकार से भी सैनिक अथवा सामुद्रिक हानि पहुंचने की संभावना न हो। यदि ईश्वर की इच्छा प्रतिकूल न हुई होती, जिस की कि किसी भी मरहठा व्यक्ति को आशा न थी—आंगरे के सत्यानाश के पश्चात् मरहठों की जलसेना भी बड़ी शक्तिशाली हो गई होती। इतना होते हुये भी अंग्रेजों को कम से कम पश्चिमी किनारे पर भी कुछ विशेष लाभ प्राप्त न हुआ। शिवाजी के समय में जो कुछ उनके अधीन था वही उनके अधीन रहा उसमें वे कोई और वृद्धि न कर सके। लेकिन बंगाल में अंग्रेजों ने मैदान खुला पाया। क्लाईव के समय में अंग्रेज़ प्रथम बड़े शान्त थे, किन्तु जब विजय प्राप्त करके जगे, तब यदि मरहठे न होते तो उन्होंने अपनी विजयश्री को दिल्ली तक बढ़ा