भारतकोश
हिन्दू पद-पादशाही (मराठा साम्राज्य एवं हिन्दू पुनरुत्थान इतिहास)

हिन्दू पद-पादशाही (मराठा साम्राज्य एवं हिन्दू पुनरुत्थान इतिहास)

Hindu Pad-Padashahi by Veer Savarkar

विनायक दामोदर सावरकर (वीर सावरकर) द्वारा

DevanagariHindipublished254 पृष्ठ

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बाजीराव हिन्दू-सेना लेकर इस भयानक विदेशी को रोकने के लिये निर्भयतापूर्वक कटिबद्ध न हुआ होता, तो ऐसा होने में कुछ सन्देह भी न था। दबने या भयभीत होने के स्थान पर बाजीराव की कल्पना शक्ति जाति के इस बड़े संकटपूर्ण समय पर और भी ऊंची उड़ने लगी। नादिरशाह के आने पर उसे एक बहुत उत्तम अवसर दिखाई देने लगा। वह सोचने लगा कि जो हिन्दू-इतिहास सौ वर्ष में पूरा होता, वह अब केवल एक वर्ष में ही संपूर्ण जायगा। उसके योग्य राजदूत उत्तर भारत के भिन्न भिन्न राजदरबारों में बड़ी चतुरता और उत्साह के साथ कार्य कर रहे थे और सेनापति रणक्षेत्रों में ख्याति प्राप्त कर रहे थे। जिस प्रकार पोवार, शिण्डे, गूजर, ऐङ्गरे और दूसरे मरहठों-जनरलों ने युद्धविद्या में नाम और सफलता प्राप्त की थी, वैसे ही व्यांकोजी राव, विश्वासराव, दादा जी, गोविन्दनारायण, सदाशिव, बालाजी, बाबूराव, मल्हार और महादेव भट्ट हिजने राजनैतिक विषयों के पण्डित समझे जाते थे और उन लोगों ने उतनी ही सफलता भी प्रप्त की थी। वास्तव में इन महाराष्ट्र-राजनीति विशारद पुरुषों ने ही इस हिन्दू- आन्दोलन के उच्च आदर्श और राजनीतिक सिद्धान्त को उचित रीति से स्थिर रक्खा। वे बड़ी योग्यता से ऐसी परिस्थिति उत्पन्न करते रहे जिस से मरहटे सैनिक सफलतापूर्वक कार्य करने में अग्रसर रहें। इन राज- नीतिज्ञ पुरुषों के पत्र-व्यवहार अब छपे हुए मिलते हैं, जिन्हें पढ़कर पाठक मरहटा राजनीतिज्ञों, कूटनीतिज्ञों, योद्धाओं तथा मल्लाहों की आयो- जनाओं, आशाओं और आश्चर्यजनक प्रयत्नों के महत्व से प्रभावित हुए बिना नहीं रह सकते। उनके ये प्रयत्न केवल एक, और एक ही आशा तथा उद्देश्य लिये थे वह यह कि एक ऐसा दृढ़ हिन्दू-राज्य स्थापित हो, जो हिन्दू-जाति की राजनैतिक स्वतन्त्रता का रक्षक और पोषक हो। मरहठों की इसी आयोजना को नष्ट करने के लिये, औरङ्गजेबी शिक्षा प्राप्त मुसलमान-राजनीतिज्ञों ने नादिरशाह को बुलाया, क्योंकि वे मरहठों