ईशादि नौ उपनिषद्

ईशादि नौ उपनिषद्
Ishadi Nau Upanishad
ऋषिगण द्वारा
स्रोत: Gita Press Gorakhpur · Gita Press Gorakhpur (उद्गम)
DevanagariHindipublished548 पृष्ठ
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( १२ )
| मन्त्र | विषय | पृष्ठ |
|---|---|---|
| ६ | चौथे प्रश्नके उत्तरमें जीवात्माद्वारा निद्राजनित सुखके अनुभव करनेका उल्लेख ..... | २०८ |
| ७—११ | पाँचवें प्रश्नके उत्तरमें इन्द्रियादि सम्पूर्ण देवोंके तथा जीवात्माके भी परम आश्रय परमेश्वरका निरूपण और उनकी प्राप्तिसे परम शान्तिका कथन ..... | २०९ |
( पञ्चम प्रश्न )
| १ | अँकारोपासनाके विषयमें सत्यकामका प्रश्न ..... | २१३ |
|---|---|---|
| २ | पिप्पलादका उत्तरमें अँकारको ही पर और अपर ब्रह्मस्वरूप बताना तथा अँकारोपासनासे साधकके इच्छानुसार दोनोंमेंसे एककी प्राप्तिरूप फल बतलाना ..... | २१४ |
| ३ | एकमात्रासंयुक्त अँकारोपासनासे पृथ्वीलोकमें महिमा पानेका उल्लेख ..... | २१५ |
| ४ | द्विमात्रासंयुक्त अँकारोपासनासे चन्द्रलोकमें ऐश्वर्यप्राप्तिका उल्लेख .... | २१६ |
| ५-६ | त्रिमात्रासंयुक्त अँकारोपासनासे परम पुरुषके साक्षात्कार होनेका तथा तीनों मात्राओंसहित अँकारकी उपासनाका रहस्य ..... | २१६ |
| ७ | अँकारोपासनाका उपसंहार ..... | २१९ |
( षष्ठ प्रश्न )
| १ | सोलह कलावाले पुरुषके विषयमें सुकेशाका प्रश्न ..... | २२० |
|---|---|---|
| २ | पिप्पलादद्वारा उत्तरमें सोलह कलाके समुदायरूप जगत्के उत्पादक परमेश्वरका निरूपण ..... | २२१ |
| ३—५ | पुरुषोत्तमका तत्त्व समझानेके लिये सृष्टि-क्रम और प्रलयका वर्णन ..... | २२२ |
| ६ | सर्वाधार परमेश्वरके ज्ञानसे जन्म-मृत्युके अभावका उल्लेख ..... | २२५ |
| ७ | उपदेशका उपसंहार ..... | २२५ |
| ८ | शिष्योद्धार कृतज्ञताप्रकाश और ऋषि-वन्दना शान्तिपाठ ..... | २२६ |
| शान्तिपाठ ..... | २२७ |
( ५ ) मुण्डकोपनिषद्
| उपनिषद्के सम्बन्धमें प्राक्कथन तथा शान्तिपाठ ..... | २२८ |
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