भारतकोश
ईशादि नौ उपनिषद्

ईशादि नौ उपनिषद्

Ishadi Nau Upanishad

ऋषिगण द्वारा

स्रोत: Gita Press Gorakhpur · Gita Press Gorakhpur (उद्गम)

DevanagariHindipublished548 पृष्ठ

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मन्त्रविषयपृष्ठ
वेदोंकी रहस्यभूत उपनिषद्-विद्याको जाननेवाले ब्रह्मा तथा देवता और ऋषिगणोंके अमृतरूप हो जानेका उल्लेख.......... ४९४
जीवात्माकी स्वकर्मानुसार देवयान, पितृयान और नाना योनियोंमें जन्म-मृत्युके चक्रमें घूमणारूप तीन गतियोंका प्रकरण.......... ४९५
८—१०जीवात्माके स्वरूपका विवेचन.......... ४९६
११मनुष्ययोनिमें अथवा विभिन्न योनियोंमें पृथक्-पृथक् संकल्प, स्पर्श, दृष्टि, मोह, भोजन, जलपान और वृष्टिसे सजीव शरीरकी वृद्धि और जन्म होनेका उल्लेख.......... ४९९
१२जीवके आवागमनका कारण.......... ५००
१३अनादिकालसे चले आते हुए जन्म-मरणरूप बन्धनसे छूटनेका उपाय.......... ५०१
१४अध्यायके उपसंहारमें परमात्माकी प्राप्तिके उपायका संकेत.......... ५०२

षष्ठ अध्याय

मन्त्रविषयपृष्ठ
पुनः स्वभाव और कालकी जगत्कारणताका खण्डन तथा परमेश्वरकी महिमासे सृष्टिचक्रके संचालनका समर्थन.......... ५०३
उन सर्वव्यापी, सर्वज्ञ, कालके भी काल, सर्वगुण-सम्पन्न, सर्व-शासक परके चिन्तनका आदेश.......... ५०४
परमात्माके द्वारा जीवात्माका गुण आदिके साथ सम्बन्ध कराये जानेका वर्णन.......... ५०४
भगवदर्पणरूप कर्मयोगके अनुष्ठानसे कर्मबन्धनके नाशका कथन.......... ५०५
भगवत्प्राप्तिके लिये उपासनारूप दूसरे साधनका वर्णन.......... ५०६
ज्ञानयोगरूप तीसरे साधनका फलसहित निरूपण.......... ५०७
प्रथम अध्यायमें कथित ध्यानके द्वारा परमेश्वरका साक्षात्कार करनेवाले महात्मा पुरुषोंके मुखसे जगत्के सर्वश्रेष्ठ कारणरूप परमात्माकी महिमाका कथन.......... ५०८
८-९परमेश्वरकी असीम ज्ञान, बल और क्रियारूप स्वाभाविक विविध शक्तियोंका वर्णन तथा उनकी अतुलनीय महत्ताका प्रतिपादन.......... ५०९