ईशादि नौ उपनिषद्

ईशादि नौ उपनिषद्
Ishadi Nau Upanishad
ऋषिगण द्वारा
स्रोत: Gita Press Gorakhpur · Gita Press Gorakhpur (उद्गम)
DevanagariHindipublished548 पृष्ठ
पृष्ठ 27, कुल 548 में से
संदर्भ में पढ़ेंपृष्ठ 27
( २५ )
| मन्त्र | विषय | पृष्ठ |
|---|---|---|
| ६ | वेदोंकी रहस्यभूत उपनिषद्-विद्याको जाननेवाले ब्रह्मा तथा देवता और ऋषिगणोंके अमृतरूप हो जानेका उल्लेख | .......... ४९४ |
| ७ | जीवात्माकी स्वकर्मानुसार देवयान, पितृयान और नाना योनियोंमें जन्म-मृत्युके चक्रमें घूमणारूप तीन गतियोंका प्रकरण | .......... ४९५ |
| ८—१० | जीवात्माके स्वरूपका विवेचन | .......... ४९६ |
| ११ | मनुष्ययोनिमें अथवा विभिन्न योनियोंमें पृथक्-पृथक् संकल्प, स्पर्श, दृष्टि, मोह, भोजन, जलपान और वृष्टिसे सजीव शरीरकी वृद्धि और जन्म होनेका उल्लेख | .......... ४९९ |
| १२ | जीवके आवागमनका कारण | .......... ५०० |
| १३ | अनादिकालसे चले आते हुए जन्म-मरणरूप बन्धनसे छूटनेका उपाय | .......... ५०१ |
| १४ | अध्यायके उपसंहारमें परमात्माकी प्राप्तिके उपायका संकेत | .......... ५०२ |
षष्ठ अध्याय
| मन्त्र | विषय | पृष्ठ |
|---|---|---|
| १ | पुनः स्वभाव और कालकी जगत्कारणताका खण्डन तथा परमेश्वरकी महिमासे सृष्टिचक्रके संचालनका समर्थन | .......... ५०३ |
| २ | उन सर्वव्यापी, सर्वज्ञ, कालके भी काल, सर्वगुण-सम्पन्न, सर्व-शासक परके चिन्तनका आदेश | .......... ५०४ |
| ३ | परमात्माके द्वारा जीवात्माका गुण आदिके साथ सम्बन्ध कराये जानेका वर्णन | .......... ५०४ |
| ४ | भगवदर्पणरूप कर्मयोगके अनुष्ठानसे कर्मबन्धनके नाशका कथन | .......... ५०५ |
| ५ | भगवत्प्राप्तिके लिये उपासनारूप दूसरे साधनका वर्णन | .......... ५०६ |
| ६ | ज्ञानयोगरूप तीसरे साधनका फलसहित निरूपण | .......... ५०७ |
| ७ | प्रथम अध्यायमें कथित ध्यानके द्वारा परमेश्वरका साक्षात्कार करनेवाले महात्मा पुरुषोंके मुखसे जगत्के सर्वश्रेष्ठ कारणरूप परमात्माकी महिमाका कथन | .......... ५०८ |
| ८-९ | परमेश्वरकी असीम ज्ञान, बल और क्रियारूप स्वाभाविक विविध शक्तियोंका वर्णन तथा उनकी अतुलनीय महत्ताका प्रतिपादन | .......... ५०९ |