भारतकोश
ईशादि नौ उपनिषद्

ईशादि नौ उपनिषद्

Ishadi Nau Upanishad

ऋषिगण द्वारा

स्रोत: Gita Press Gorakhpur · Gita Press Gorakhpur (उद्गम)

DevanagariHindipublished548 पृष्ठ

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( २६ )

१० जगत्के अभिन्न निमित्तोपादानस्वरूप परमात्माकी स्तुति करते हुए उनसे अपने ब्रह्मस्वरूपमें आश्रय देनेके लिये प्रार्थना ......... ५१० ११—१३ परब्रह्म परमात्माके सर्वव्यापी, अन्तर्यामी, साक्षी, चेतन एवं कारणस्वरूपका निरूपण एवं उनको जाननेवाले महापुरुषोंके लिये मोक्षकी प्राप्तिका प्रतिपादन ......... ५११ १४ सूर्य-चन्द्रादि ज्योतियोंकी परब्रह्मको प्रकाशित करनेमें असमर्थता तथा परमात्माके प्रकाशसे ही सबको प्रकाश प्राप्त होनेका उल्लेख ...... ५१३ १५—१७ परमधामकी प्राप्तिके लिये अखिल कल्याणमय दिव्य गुणसम्पन्न सर्वेश्वरके स्वरूपका विशेषतासे वर्णन ......... ५१४ १८ परमदेव पुरुषोत्तमको जानने और पानेके लिये उनकी शरण लेनेका प्रकार ......... ५१७ १९ निर्गुण निराकार परमात्माके स्वरूपका निर्देश ......... ५१८ २० परमात्मज्ञानके बिना दुःख-निवृत्तिकी असम्भवता ......... ५१८ २१ श्वेताश्वतर ऋषिको तपसे और भगवत्कृपासे ब्रह्मज्ञान प्राप्त होने तथा उसके द्वारा अधिकारियोंको उपदेश दिये जानेका कथन ......... ५१९ २२ अशान्तचित्त अनधिकारीके प्रति उपदेश देनेका निषेध ......... ५२० २३ परमेश्वर और गुरुमें श्रद्धा-भक्ति रखनेवालेको दिये हुए उपदेशकी सफलताका कथन ......... ५२० शान्तिपाठ ......... ५२१