भारतकोश
ईशादि नौ उपनिषद्

ईशादि नौ उपनिषद्

Ishadi Nau Upanishad

ऋषिगण द्वारा

स्रोत: Gita Press Gorakhpur · Gita Press Gorakhpur (उद्गम)

DevanagariHindipublished548 पृष्ठ

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खण्ड १ ]

ऐतरेयोपनिषद्

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अनुभवको धारण करनेकी शक्ति, देखनेकी शक्ति, धैर्य अर्थात् विचलित न होनेकी शक्ति, बुद्धि अर्थात् निश्चय करनेकी शक्ति, मनन करनेकी शक्ति, वेग अर्थात् क्षणभरमें कहीं-से-कहीं चले जानेकी शक्ति, स्मरण-शक्ति, संकल्प-शक्ति, मनोरथ-शक्ति, प्राण-शक्ति, कामना-शक्ति और स्त्री-सहवास आदिकी अभिलाषा—इस प्रकार जो ये शक्तियाँ हैं, वे सब-की-सब उस स्वच्छ ज्ञानस्वरूप परमात्माके नाम हैं अर्थात् उसकी सत्ताका बोध करानेवाले लक्षण हैं; इन सबको देखकर इन सबके रचयिता, संचालक और रक्षककी सर्वव्यापिनी सत्ताका ज्ञान होता है॥ २॥

एष ब्रह्मैष इन्द्र एष प्रजापतिरेते सर्वे देवा इमानि च पञ्च महाभूतानि पृथिवी वायुराकाश आपो ज्योतीर्षीत्येतानीमानि च क्षुद्रमिश्राणीव बीजानीतराणि चेतराणि चाण्डजानि च जारुजानि च स्वेदजानि चोद्भिज्जानि चाश्रा गावः पुरुषा हस्तिनो यत्किञ्चेदं प्राणि जङ्गमं च पतत्रि च यच्च स्थावरं सर्वं तत्प्रज्ञानेत्रम् । प्रज्ञाने प्रतिष्ठितं प्रज्ञानेत्रो लोकः प्रज्ञा प्रतिष्ठा प्रज्ञानं ब्रह्म ॥ ३ ॥

एषः=यह; ब्रह्म=ब्रह्मा है; एषः=यह; इन्द्रः=इन्द्र है; एषः=यही; प्रजापतिः=प्रजापति है; एते=ये; सर्वे=समस्त; देवाः=देवता; च=तथा; इमानि=ये; पृथिवी=पृथ्वी; वायुः=वायु; आकाशः=आकाश; आपः=जल; (और) ज्योतीर्षि=तेज; इति=इस प्रकार; एतानि=ये; पञ्च=पाँच; महाभूतानि=महाभूत; च=तथा; इमानि=ये; क्षुद्रमिश्राणि इव=छोटे-छोटे, मिले हुए-से; बीजानि=बीजरूप समस्त प्राणी; च=और; इतराणि=इनसे भिन्न; इतराणि=दूसरे; च=भी; अण्डजानि=अंडेसे उत्पन्न होनेवाले; च=एवं; जारुजानि=जेरसे उत्पन्न होनेवाले; च=तथा; स्वेदजानि=पसीनेसे उत्पन्न होनेवाले; च=और; उद्भिज्जानि=जमीन फोड़कर उत्पन्न होनेवाले; च=तथा; अश्राः=घोड़े; गावः=गायें; हस्तिनः=हाथी; पुरुषाः=मनुष्य (ये सब-के-सब मिलकर); यत् किम् च=जो कुछ भी; इदम्=यह जगत् है; यत् च=जो भी कोई; पतत्रि=पोंखोंवाला; च=और; जङ्गमम्=चलने-फिरनेवाला; च=और; स्थावरम्=नहीं चलनेवाला;