ईशादि नौ उपनिषद्

ईशादि नौ उपनिषद्
Ishadi Nau Upanishad
ऋषिगण द्वारा
स्रोत: Gita Press Gorakhpur · Gita Press Gorakhpur (उद्गम)
DevanagariHindipublished548 पृष्ठ
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( ५३२ )
| मन्त्रप्रतीकानि | उ० | अ० | मु० | व० | खं० | प्र० | अनु० | मं० | पृष्ठ |
|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|
| द्वा सुपर्णा सयुजा सखाया | श्वे० | ४ | ... | ... | ... | ... | ... | ६ | ४७७ |
| द्वे अक्षरे ब्रह्मपरे त्वनन्ते | ,, | ५ | ... | ... | ... | ... | ... | १ | ४९० |
| धनुर्गृहीत्वौपनिषदम् | मुण्डक० | ... | २ | ... | २ | ... | ... | ३ | २५८ |
| न तत्र चक्षुर्गच्छति | केन० | ... | ... | ... | १ | ... | ... | ३ | ५० |
| न जायते म्रियते वा | कठ० | १ | ... | २ | ... | ... | ... | १८ | ११३ |
| न तत्र सूर्यो भाति | ,, | २ | ... | २ | ... | ... | ... | १५ | १५६ |
| न नरेणावरेण | ,, | १ | ... | २ | ... | ... | ... | ८ | १०५ |
| न प्राणेन नापानेन | ,, | २ | ... | २ | ... | ... | ... | ५ | १४९ |
| न वित्तेन तर्पणीयः | ,, | १ | ... | १ | ... | ... | ... | २७ | ९६ |
| न संदृशे तिष्ठति | ,, | २ | ... | ३ | ... | ... | ... | ९ | १६३ |
| न साम्परायः प्रतिभाति | ,, | १ | ... | २ | ... | ... | ... | ६ | १०३ |
| न चक्षुषा गृह्यते | मुण्डक० | ... | ३ | ... | १ | ... | ... | ८ | २७१ |
| न तत्र सूर्यो भाति | ,, | ... | २ | ... | २ | ... | ... | १० | २६३ |
| न कञ्चन वसतौ | तैत्ति० | ... | ... | ३ | ... | ... | १० | १ | ४२१ |
| नवद्वारे पुरे देही | श्वे० | ३ | ... | ... | ... | ... | ... | १८ | ४७० |
| न संदृशे तिष्ठति रूपमस्य | ,, | ४ | ... | ... | ... | ... | ... | २० | ४८८ |
| न तस्य कार्यं करणं च | ,, | ६ | ... | ... | ... | ... | ... | ८ | ५०९ |
| न तत्र सूर्यो भाति न | ,, | ६ | ... | ... | ... | ... | ... | १४ | ५१३ |
| न तस्य कश्चित् पतिरस्ति | ,, | ६ | ... | ... | ... | ... | ... | ९ | ५०९ |
| नाहं मन्ये सुवेदेति | केन० | ... | ... | ... | २ | ... | ... | २ | ५५ |
| नाचिकेतमुपाख्यानम् | कठ० | १ | ... | ३ | ... | ... | ... | १६ | १३३ |
| नायमात्मा प्रवचनेन | ,, | १ | ... | २ | ... | ... | ... | २३ | ११७ |
| नाविरतो दुश्चरितात् | ,, | १ | ... | २ | ... | ... | ... | २४ | ११८ |
| नायमात्मा प्रवचनेन | मुण्डक० | ... | ३ | ... | २ | ... | ... | ३ | २७५ |
| नायमात्मा बलहीनेन | ,, | ... | ३ | ... | २ | ... | ... | ४ | २७६ |