भारतकोश
जातक पारिजात (वैद्यनाथ दीक्षित - शास्त्रीय होरा फलित, राजयोग एवं आयुर्दाय सटीक)

जातक पारिजात (वैद्यनाथ दीक्षित - शास्त्रीय होरा फलित, राजयोग एवं आयुर्दाय सटीक)

Jataka Parijata of Vaidyanatha Dikshita with Commentary

वैद्यनाथ दीक्षित (टीकाकार: पं. कपिलेश्वर शास्त्री एवं पं. मातृप्रसाद शास्त्री) द्वारा

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१२८ सटीकजातकपारिजाते- परन्तु स्मरण रखिये कि यहां उनका पापवाला कार्य नहीं है अर्थात् आधा भाग घटेगा पूरा भाग नहीं घटेगा, ऐसा सत्याचार्यने कहा है ॥ ९-१० ॥ अथ क्रूरोदयहरणम् । सार्द्धोदितोदितनवांशहतात्समस्ताद् भागोऽष्टयुक्तशतसंख्य उपैति नाशम् । क्रूरे विलग्नसहिते विधिना त्वनेन सौम्येक्षिते दलमतः प्रलयं प्रयाति ॥ ११ ॥ लिप्तीभूतैर्लग्नभागैर्निहन्यादायूर्दायं खेचराणां पृथक्स्थम् । व्योमाकाशग्विन्दुपक्षैर्भजेत्तत् स्वायुर्दायाच्छोध्यमब्दादि लब्धम् ॥ १२ ॥ एतत् क्रूरे लग्नके सौम्यदृष्टे तस्मिन्पापे तत्फलाद्धं विशोध्यम् । एतद्दायनांशसञ्ज्ञे विधेयं पिण्डायुर्वत् कर्म नैसर्गिके च ॥ १३ ॥ इदानीं लग्नस्थे पापग्रहे हरणमाह । क्रूरे = पापग्रहे विलग्नसहिते = लग्ने विद्यमाने [L