जातक पारिजात (वैद्यनाथ दीक्षित - शास्त्रीय होरा फलित, राजयोग एवं आयुर्दाय सटीक)
Jataka Parijata of Vaidyanatha Dikshita with Commentary
वैद्यनाथ दीक्षित (टीकाकार: पं. कपिलेश्वर शास्त्री एवं पं. मातृप्रसाद शास्त्री) द्वारा
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संदर्भ में पढ़ें१५६ सटीकजातकपारिजाते- शनि अष्टममें हो, बलरहित चन्द्रमा दशममें हो और सूर्य सुखभाव (४) में हो तो काष्ठोंकी ढेरमें दब कर मृत्यु होती है। लग्नेश पापग्रहोंके मध्यमें हो केतुसे युत हो और लग्नसे अष्टम स्थान पापग्रहसे युक्त हो तो माताके कोपसे मृत्यु होती है ॥ १०५ ॥ काष्ठाघातान्मृत्युः । मातृकोपन्मृत्युः । [कुण्डली १ (काष्ठाघातान्मृत्युः) : लग्न ११, चतुर्थ २ सू., अष्टम ६ श., दशम ८ चं.] [कुण्डली २ (मातृकोपन्मृत्युः) : लग्न शु. के., द्वितीय श., अष्टम मं.] सुखास्पदस्थैरशुभैर्ग्रहेन्द्रैस्त्रिकोणगैरर्वाऽथ विलग्नराशौ ॥ रन्ध्रेश्वरे भूत नयेन सार्द्धं उद्बन्धनात्तस्य मृतिं वदन्ति ॥ १०६ ॥ अशुभैर्ग्रहेन्द्रैः = पापग्रहैः सुखास्पदस्थैश्च- तुर्यदशमभावगतैरथवा त्रिकोणगैर्नवमपञ्चम-