भारतकोश
जातक पारिजात (वैद्यनाथ दीक्षित - शास्त्रीय होरा फलित, राजयोग एवं आयुर्दाय सटीक)

जातक पारिजात (वैद्यनाथ दीक्षित - शास्त्रीय होरा फलित, राजयोग एवं आयुर्दाय सटीक)

Jataka Parijata of Vaidyanatha Dikshita with Commentary

वैद्यनाथ दीक्षित (टीकाकार: पं. कपिलेश्वर शास्त्री एवं पं. मातृप्रसाद शास्त्री) द्वारा

DevanagariHindipublished588 पृष्ठ

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२४४ सटीकजातकपारिजाते- २. हरयोगोदाहरणम् । ३. विधियोगोदाहरणम् । द्वितीयेशसे २।१२।८ स्थानोंमें शुभग्रह हों तो 'हरि' योग होता है । सप्तमेशसे ४।९।८ स्थानोंमें यथा सम्भव गुरु, चन्द्रमा और बुध हों तो 'हर' योग होता है । लग्नेशसे ४।१०।११ स्थानोंमें यथा सम्भव सूर्य, शुक्र और मन्द हों तो 'ब्रह्म' योग होता है ऐसा प्राचीन आचार्यों ने कहा है । ( सु० ज्ञा० कार ) ॥ १६२ ॥ इन तीनों हरि-हर तथा विधि योगोंमें उत्पन्न हुआ जातक सभी शास्त्रों को जाननेवाला सत्यवादी, सकल सुखका भोगी, प्रियवादी, कामशील, सब शत्रुओंको जीतनेवाला, सब जीवोंका उपकारकर्ता तथा पुण्य कर्म करनेवाला होता है ॥ १६३ ॥ अथ नाभसयोगाः। यूपेषुशक्तियवदण्डगदासमुद्रच्छत्राद्र्धचन्द्रशकटाम्बुजपक्तियोगाः । नौचक्रवज्रहलकार्मुककूटवापीशृङ्गाटकाश्च विविधाकृतिविंशतिः स्युः ॥ १६