कल्कि पुराण (संस्कृत मूल एवं हिन्दी अनुवाद)
Kalki Purana with Sanskrit Original & Hindi Translation
महर्षि कृष्णद्वैपायन वेदव्यास द्वारा
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संदर्भ में पढ़ें४०४ ] कल्कि-पुराण
जब प्रलय काल बीत जाता है तब आपके नाभि कमल से उनका पुन, उद्भव होता है ।१६। मैं उक्त काल का अ श रूप ही कृतयुग हूँ। मेरे द्वारा श्रेष्ठ धर्म पाला जाता है । मेरे द्वारा सम्पूर्णां प्रजा धर्म का अनुष्ठान करते हुए धन्य हो जाती है इसी लिए ज्ञानीजन मुझे कृतयुग कहते है ।१७। सत्ययुग के इस प्रकार के वचनो को सुन कर अपने जनो के सहित कल्किजी परम हर्षित हुए ।१८। कलियुग के नाश मे समर्थ कल्किजी ने सत्ययुग को आया देख कर कलियुग के शासन मे स्थित विशसन नामक नगरी मे युद्ध करने की इच्छा करते हुए अपने अनुया- यियो से बोले ।१६। हाथी पर आरूढ होकर युद्ध करने वाले, अश्व और रथ पर चढ कर युद्ध करने वाले तथा पदाति सैनिक जो देह पर अद्भुत स्वर्णाभूषण और शस्त्रास्त्रो के धारण करने वाले हैं, ऐमे युद्ध-कुशल वीरो की गणना करो ।२०।