भारतकोश
कल्कि पुराण (संस्कृत मूल एवं हिन्दी अनुवाद)

कल्कि पुराण (संस्कृत मूल एवं हिन्दी अनुवाद)

Kalki Purana with Sanskrit Original & Hindi Translation

महर्षि कृष्णद्वैपायन वेदव्यास द्वारा

DevanagariHindipublished259 पृष्ठ

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पृष्ठ 180

दशम अध्याय ] [ ४३३ वाला है ।३। मेरे सर्व दुर्जेय पति के द्वारा यदि आपका कोई अपराध बन पडा हो तो भी इनके प्रति शत्रु-भाव न रख कर इन पर कृपा करिये, अन्यथा कोई आपको कृपामय ईश्वर नही कहेगा ।४। आपकी पत्नी प्रकृति महत्तत्व, अहकार और पचतन्मात्र के द्वारा देह रचती है । आपके ही निरीक्षण में लीला से ही ब्रह्म कल्पित विश्व में सृष्टि, स्थिति और लय का क्रम चलता है ।५। भूविष्न्मरुद्वारितेजसा राशिभिः शरीरेन्द्रियाश्रितैः ॥ त्रिगुणया स्वया मायया विभो कुरु कृपा भवत्सेवनाथिनाम् तव गुणालय नाम पावन कलिमलापह कीर्तयन्ति ये । भवभयक्षय तापनाशिनो मुहुरहो जनाः ससरन्ति नो । ।७।। तव जन्म सतां मानवर्द्धनं निजकुलक्षय देवपालकम् । कृतयुगार्पकं धर्म्मपूरकं कलिकुलान्तक शन्तनोतु मे ।।८।। मम गृहं पतिपुत्रनप्तृक गजरथैर्ध्वजैश्चामरैर्धनै । मणिवरासनसत्कृतिं विना तवा पदाम्बजयोः शोभयन्ति किम् तव जगद्वपुः सुन्दरम्मिन मुखमनिन्दितं सुन्दरारवम् । यदि नमे प्रिय वल्गुचेष्टिते परिकरोत्यहो मृत्युरस्तिवह ।।१०।। हे देव ! पृथिवी, जल, तेज, वायु और आकाश तत्व से युक्त यह पच भूतात्मक शरीर इन्द्रियो के आश्रित रहते हैं। अपनी त्रिगुणा- त्मिका माया से अपने भक्तो पर कृपा कीजिये ।६। हे प्रभो ! आपके नाम गुण-कीर्तन से कलियुग के सभी पाप नष्ट हो जाते हैं । आपका वह नाम अनन्त गुणो से युक्त और भवभय का नाश करने वाला है, जो ससार ताप से पीडित प्राणी उसका स्मरण करते हैं, उनका जन्म- मरण रूप बधन कट जाता है ।७। आपका यह अवतार साधुओ का मान बर्द्धक, कलिकुल नाशक, देवताओ का पालक, धर्म पूरक तथा सत्युग का पुनः स्थापक है । आपके इस अवतार से हमारा कल्याण हो ।८। मेरे घर मे पति, पुत्र, पौत्र, गज, रथ, ध्वज, चमर, धन और मणि जटिल श्रेष्ठ आसनादि सब कुछ वर्तमान हैं। परन्तु आपके