भारतकोश
कल्कि पुराण (संस्कृत मूल एवं हिन्दी अनुवाद)

कल्कि पुराण (संस्कृत मूल एवं हिन्दी अनुवाद)

Kalki Purana with Sanskrit Original & Hindi Translation

महर्षि कृष्णद्वैपायन वेदव्यास द्वारा

DevanagariHindipublished259 पृष्ठ

पृष्ठ 185, कुल 259 में से

संदर्भ में पढ़ें
पृष्ठ 185

४३८ ] कल्कि पुराण सभी वर्ण के लोग अद्भुत आभूषणो और विविध प्रकार की भोग- सामग्रियो को प्राप्त करके उस सभा मे सुशोभित कल्किजी के सब ओर बैठ कर शोभा को प्राप्त होने लगे ।३१-३२। जैसे तारागण के मध्य पूर्ण चन्द्र की अत्यन्त शोभा होती है, वैसे ही सब लोगो के मध्य मे सुशोभित राजाओ के भी स्वामी कल्किजी सब लोको को मोहित करने लगे ।३३। पद्म पलाश जैसे नेत्र वाले कल्किजी ने सभा मे उपस्थित राजाओ आदि के समक्ष रमा का पाणिग्रहण किया। उस समय राजा शशिध्वज भी कल्किजी को जामाता-भाव से देखते हुए भक्ति-युक्त हृदय से सभा मे अत्यन्त शोभा को प्राप्त हुए ।३४।

कल्कि पुराण (संस्कृत मूल एवं हिन्दी अनुवाद) · पृष्ठ 185, कुल 259 में से · BharatKosha