कल्कि पुराण (संस्कृत मूल एवं हिन्दी अनुवाद)
Kalki Purana with Sanskrit Original & Hindi Translation
महर्षि कृष्णद्वैपायन वेदव्यास द्वारा
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संदर्भ में पढ़ें३१८ ] [ कल्कि पुराण इत्यारूपायासु शिबिकामारुह्य परिवारिता । मखीभिश्चारुवेशाभिर्भूत्वा स्वान्त पुराद्बहिः । प्रययौ त्वरित द्रष्टु भैष्मी यदुपति यथा ।१३। जना पुमांस पथि ये पुरस्थाः प्रदु वु. स्त्रीत्व- भयाद्दिगन्तरम् । शृङ्गाटके वा विपणि स्थिता ये निजाङ्गगास्थापितपुण्यकार्या, ।१४। निवारिता ता शिबिकां वहन्त्यः नार्योऽतिमत्ता वलवत्तराश्च । पद्मा शुकोक्त्या तदुपर्युपस्था जगाम ताभि. परिवारिताभि ।१५। इस प्रकार परस्पर सम्वाद होने पर पद्मा अत्यन्त हर्षित हुई वह उसके मुख के समक्ष मुख, नेत्र के समक्ष नेत्र करके उसे आनन्द पूर्वक देखने लगी ।१०। उसकी आठ नायिका सखियाँ है - विमला, मालिनी, लोला, कमला, कामकन्दला, विलासिनी, चारुमती और कुमुदा । उन सखियो सहित जल-क्रीडा के लिए तत्पर होकर पद्मा उनसे बोली कि यह सखियां मेरे साथ सरोवर क तट पर चले ।११-१२। यह कह कर पद्मा पालकी पर आरूढ होकर सखियो सहित अन्त पुर से चल पडी । कृष्ण के दर्शनार्थ जाती हुई रुक्मणी के समान ही कल्कि भगवान् के दर्शन के लिए पद्मा ने भी शीघ्रता पूर्वक प्रस्थान किया ।१३। पद्मा जिस मार्ग से जा रही थी, उस माग मे स्थित पुरुष उसे देखते ही कही स्त्री न बन जाय इस आशका से इधर-उधर भाग गये । उन भागने वालो को पत्नियां उनके निरापद रहने के लिए पुण्य कर्मों का अनुष्ठान करने लगी ।१४। इस प्रकार मार्ग को पुरुषो से रहित देख कर शक्ति- मती स्त्रियां पालकी को स्वच्छन्दता से वहन करने लगी - शुक के कथना- नुसार पालकी पर चढी हुई पद्मा को घेर कर उसकी सखियां भी साथ चल रही थी ।१५। सरोजल सारसलुसनादितप्रफुल्लपद्मोद्भवरेणुवासितम् । चेरुर्विगाह्याशु सुधाकरालसा. कुमुद्वतीनांमुदयाशोभन्तः ।१६।