करूँ जगत से न्यार
Karun Jagat Se Nyaar
सतगुरु मधु परमहंस जी द्वारा
स्रोत: साहिब बंदगी आध्यात्मिक संस्थान · साहिब बंदगी (उद्गम)
पृष्ठ 117, कुल 264 में से
संदर्भ में पढ़ेंपड़ जाता है । सोचो, क्या यही होती है मुक्ति ! नहीं ! मुक्ति होती है—सदा के लिए संसार - सागर से छूटना, फिर कभी भी माँ के गर्भ में नहीं आना । पर ये कैसी मुक्तियाँ हैं ? तभी तो— संत न मुक्ति चाहते, नहीं पदार्थ चार। नहीं पदार्थ चार, मुक्ति संतन की चेरी || संसार के सब जीव छूटना चाह रहे हैं। संसार को दुखों का सागर मानकर पार होने का प्रयत्न कर रहे हैं । तीर्थ, स्नान, व्रत, जप, तप, योग, ध्यान और न जाने क्या-क्या कर रहे हैं। पर अफ़सोस ! छुटकारा नहीं मिल पा रहा है । काल का दण्ड सबको छलनी किये जा रहा है । भक्ति का एकमात्र लक्ष्य मुक्ति होना चाहिए, पर कैसी विडंबना है कि हम भक्ति के बावजूद मुक्त नहीं हो पा रहे हैं। क्यों ? संतों का मानना है कि ब्रह्माण्ड में जितनी भी भक्तियाँ प्रचलित हैं, वे सभी काल-पुरुष की सीमा तक का चक्कर कटवाने वाली उसी की भक्तियाँ हैं और उन भक्तियों से महानिर्वाण की प्राप्ति में हम सफल नहीं हो सकते हैं । तो क्या वेद - शास्त्र आदि हमारी आत्मा के कल्याण की बात नहीं कर रहे हैं ? कर रहे हैं । अवश्य कर रहे हैं । लेकिन वे भी चार सीमित समय की मुक्तियों की बात कर रहे हैं। जिन मुक्तियों के लिए वो कह रहे हैं, उनसे हमारी आत्मा का कोई सरोकार नहीं है, क्योंकि उनसे हमारी आत्मा सदा के लिए नहीं छूट सकती है । यह बात वे स्वयं भी स्वीकार कर रहे हैं। उनका मानना है कि कर्मानुसार ही जीव इन मुक्तियों को प्राप्त करता है और कर्मानुसार ही इनकी अवधि है । कर्मों के क्षीण होने पर पुनः मृत्यु-लोक में आना पड़ता है । कहने का भाव यह है कि इन मुक्तियों से T भी बार-बार जन्म मिलेगा, बार- बार माँ के पेट में आना पड़ेगा। सगुण भक्ति का लक्ष्य स्वर्ग की प्राप्ति है, पर पुनर्जन्म फिर होगा । कोई सोचे कि सगुण से पुनर्जन्म से छुटकारा पा लेंगे तो ऐसा नहीं होगा । निर्गुण में बाहरी पूजा को महात्म नहीं दिया गया, योग को महात्म दिया गया । फिर निर्गुण का लक्ष्य क्या है ? सारोप्य और सायुज्य मुक्ति। क्या यह लक्ष्य खराब है? नहीं। हम यह नहीं कह रहे । हम कह रहे हैं कि पुनर्जन्म होगा । फिरके डारि दे भूमाहिं । भू से कोई न्यारा नाहिं॥ पुनर्जन्म होगा, यह अवश्य होगा। प्रलय बाद, लाखों करोड़ों जन्मों बाद धरती पर आना होगा ।