भारतकोश
करूँ जगत से न्यार

करूँ जगत से न्यार

Karun Jagat Se Nyaar

सतगुरु मधु परमहंस जी द्वारा

स्रोत: साहिब बंदगी आध्यात्मिक संस्थान · साहिब बंदगी (उद्गम)

Devanagarihipublished264 पृष्ठ

पृष्ठ 144, कुल 264 में से

संदर्भ में पढ़ें
पृष्ठ 144

जिस भी जगह ध्यान लगाएँ, वहाँ का आकर्षण खींचता है। चुंबकीय ताकतों से वो खिंचता है; पर साधक की गुरू से बात नहीं होती है। जबकि विहंगम चाल में गुरु साथ होता है, उससे पूरी-पूरी बात होती है, सब स्थानों को बताते चलते हैं । इच्छा की तीव्र गति से चलना है तो गति तेज़ हो जाती है । इच्छा से ही बल मिलता है । जैसी इच्छा की, वैसे ही होता है । यदि रुकना चाहो तो वो भी हो जायेगा। जितनी गति चाहो, हो जायेगी । यह स्पीड लाजबाव होती है। इसकी कल्पना नहीं की जा सकती है। दसों मुकामों की यात्रा करता हुआ साधक चलता है । ब्रह्माण्ड के अंत में पहुँचता है तो उससे आगे अपनी ताक़त से किसी कीमत पर नहीं जा सकता है । यहाँ तक भी अपने योग से, परिश्रम से जाया जा सकता है। इसी से कहा- ररंकार खेचरी मुद्रा, दसवां ठिकाना । द्वार

ब्रह्मा विष्णु महेशादि ले, ररंकार को जाना॥

ररंकार तक अपनी ताक़त से जाया जा सकता है, आगे नहीं । जो विवरण मैंने दिये हैं, कोई भी नहीं दे सकता है । आप जब भी चाहें, शरीर से निकल सकते हैं। पर—

कोई कोई पहुँचा ब्रह्म लोक में, धर माया ले आई ॥

.....तो विहंगम में साधक बड़ी तीव्र गति से चलता है। जब निरंजन स्थान पर पहुँचता है तो वहाँ 4 करोड़ सूर्य का प्रकाश है, जिससे वो अपनी सुधि भूल जाता है। जैसे स्वप्न में मन अवस्था बदल देता है, ऐसे ही अवस्था बदल देता है । तब भूल जाता है। तभी सबने कहा- बेअंत .... बेअंत ..... बेअंत । वहाँ इतना आनन्द है कि सुधि नहीं रह जाती है । इतने गहन प्रकाश का स्रोत है, इसलिए ज्योति-स्वरूप कहा। इसी का वर्णन सब जगह है। यहाँ पर साधक की आत्मा को सद्गुरु अपने में समाविष्ट कर ले चलता है। वो पारदर्शी शरीर है; साधक सब देखता चलता है । जब शून्य पार हो जाता है तो फिर सद्गुरु उसे अपने वजूद से अलग करते हैं । वहाँ आत्मा प्रश्न पूछती है कि एक बात बताओ कि इतनी देर हम साथ-साथ चले, फिर आपने मुझे अपने में क्यों समाया था ? तो सद्गुरु कहते हैं कि वहाँ निरंजन का ज़ोर इतना है कि मेरे साथ होते तो भी वो खींच लेता। वो प्रभावित कर लेता, इसलिए मैं अपने में समाकर ले चलता हूँ। .....तो कोई, जो यह यात्रा किया हो और कोई कहे कि अपनी कमाई से गया तो उसे थोथा झूठ नहीं लगेगा क्या ? साहिब कह रहे हैं—