करूँ जगत से न्यार
Karun Jagat Se Nyaar
सतगुरु मधु परमहंस जी द्वारा
स्रोत: साहिब बंदगी आध्यात्मिक संस्थान · साहिब बंदगी (उद्गम)
पृष्ठ 194, कुल 264 में से
संदर्भ में पढ़ेंमाई कहती कि झगड़े का मूड भी नहीं होता तो पता नहीं क्यों हो जाता है। तो मैंने बंदे को कहा कि तुमको क्या पड़ी इनके काम बिगाड़ने की ? इनको नुक़सान क्यों कर रहा है ? कहा कि 400 साल से इस ख़ानदान के पीछे लगा हूँ। वो बोला कि मैं प्रेत-योनि में हूँ । ये प्रेत तीन तरह से मिलते हैं । एक तो सामने आ जाते हैं, एक चिंतन में आते हैं और एक नींद में दबाव डालते हैं। जो चिंतन में आते हैं, लगेगा कि कोई है। बोला कि निराकार रूप में इनको बरबाद करने में लगा हूँ। मैंने पूछा कि भाई, क्या बात है ? कहा कि इनके पूर्वजों ने मुझे मार डाला था। फिर मैं वंशहीन हो गया; मेरा वंश ख़त्म हो गया। पुराने जमाने में इंसान अपने वंश को ख़त्म नहीं होने देना चाहता था। मान लो कि मोहनलाल के दो बेटे हैं। यदि एक के पुत्र हुआ तो भी वंश रहेगा । पर दोनों को नहीं है तो वंश नहीं चलेगा। तो वंश चलाना चाहता था । तो श्राद्ध में जब एक-एक करके माँ, बाप, दादे आदि का श्राद्ध कर देते हैं तो आख़िरी यानी 16वाँ श्राद्ध अन्य पितरों के नाम करते हैं। यानी जिनके बारे में जानता नहीं हूँ। यह भूले-बिसरों के लिए होता है। तर्पण दिया जाता है। जैसे एक तो कार्ड भेजना होता है, पर एक अचानक मिल जाए तो कहते हैं कि तू भी शामिल हो जाना। यह ऐसे होता है । तो वो बोला कि मुझे तर्पण भी नहीं मिलता है; मैं चाहता हूँ कि इनका भी वंश ख़त्म हो जाए। वो बोला कि मैं इसमें कामयाब भी था । पर अब रुकावट आ गयी है। जबसे ये आपकी भक्ति में आए हैं, मैं कुछ नहीं कर पा रहा हूँ। मैंने माई को समझाया कि जो मुझसे जुड़े हैं, उनपर प्रभाव नहीं पड़ पा रहा है | सच है, मैंने आपको नाम के बाद सुरक्षित कर दिया है। लोगों को इतना मिसगाइड किया गया, कितना भड़काया गया, पर फिर भी इतने लोग जुड़े, हमारा पंथ बढ़ता ही चला गया। यानी कुछ ताक़त है नाम की । क्योंकि बंदे को अन्दर से पता चल गया है कि कोई ताक़त साथ में काम कर रही है । तो वो बोला कि अब रुकावट आ रही है । वो बोला कि मैं इनके ख़ानदान को समेट दिया था, काफ़ी क्लोज कर दिया था । पर अब नहीं समेट पाऊँगा। क्योंकि जो आपसे जुड़े हैं, उनके पास नहीं जा पाता हूँ ।