भारतकोश
काश्यप संहिता (वृद्ध जीवकीय तन्त्र व विद्योतिनी हिन्दी टीका सहित)

काश्यप संहिता (वृद्ध जीवकीय तन्त्र व विद्योतिनी हिन्दी टीका सहित)

Kashyapa Samhita Hindi

महर्षि काश्यप / जीवक (टीकाकार: श्री सत्यपाल भिषगाचार्य) द्वारा

स्रोत: Kashyapa Samhita (Vriddha Jivakiya Tantra) with Vidyotini Hindi Commentary (उद्गम)

DevanagariHindipublished942 पृष्ठ

पृष्ठ 337, कुल 942 में से

संदर्भ में पढ़ें
पृष्ठ 337

उपोद्घात का हिन्दी अनुवाद

३२३

सूर्यवंशीसूरियसमार्डिकमर्डूक
क्षत्रियखेतअप्अप्सु
अत्रिअत्तिस्तमस्त्यामत
मित्रमिश्रपुरोहितपटेसिस
शरद्सरदीश्रेष्ठिसेठ
रविरातैमाततियामत्

भारत¹ के समान मिश्र में लिङ्गपूजन तथा बैल का आदर और बेबिलोनिया में पृथ्वी की पूजा इत्यादि बहुत से समान सभ्यता के संबन्ध मिलते हैं।

ईरान के प्राचीन मूलग्रन्थ जेन्दावस्ता के चार भागों में एक भाग वेन्दिदाद नामक है, उसमें भैषज्यसम्बन्धी विषय दिये हुए हैं। उसमें सामा वंशोत्पन्न थ्रित नाम का वैद्य सर्वप्रथम था। उसने रोगनिवृत्ति के लिये अपने अहुरोमज्डा नामक देवता की प्रार्थना करके सोम (चन्द्रमा) के साथ-साथ वृद्धि को प्राप्त होने वाली दस हजार ओषधियों को प्राप्त किया। हओम (सोम) वनस्पतियों का राजा था। उस थ्रित नामक वैद्य द्वारा क्षथ्रवैर्य तथा सहरवर से रोग निवृत्ति के उपायों को जानकर तथा शस्त्रचिकित्साविज्ञान को प्राप्त करके ज्वर, कास, शिरोरोग, क्षय आदि रोगों को दूर करने के वृत्तान्त तथा ओषधियों के निर्माण के पण्डित, सुशील तथा रोगियों को प्रसन्न करने वाले वैद्यों से भवितव्यता इत्यादि की शिक्षा को ग्रहण करने के वृत्तान्त मिलते² हैं। जेन्दावस्ता तथा वैदिकसाहित्य की आलोचना करने पर ज्ञात होता है कि दोनों के देवताओं के विषय में शब्दों का सादृश्य केवल देवताओं के नामों के विषय में ही नहीं है अपितु उनमें आई हुई गाथाओं के अनुवाद से प्रतीत होता है कि उनमें संस्कृत शब्दों की भी बहुत सी समानताएं मिलती हैं। भारत के प्राचीन सम्प्रदाय की तरह यहां भी अग्नि की उपासना, होम, इष्टि, याग, आदि बहुत से विषय मिलते हैं जिनका पहले (पृ. ७८) वर्णन किया जा चुका है। हओम शब्द वाले सोम की प्रशंसा, उसका ओषधियों का राजा होना यथा यज्ञ में उपयोग आदि बहुत से विषय इसमें मिलते हैं। जेन्द तथा संस्कृत भाषा में निम्न समान शब्द³ मिलते हैं—

संस्कृतजेन्दसंस्कृतजेन्द
सरस्वतीहरह्यतिअसुरअहुर
सप्तसिन्धुहप्तहिन्दुदेवदैव
सोमहओमविश्वेदेवविश्योदैव
नासत्यनाहत्यनराशंसनैयोंसंघ
अर्यमन्एर्यमन्वायुवयु
विवस्वत्विवङ्ध्वत्वृत्रहावेरेथ्रघ्न
काव्यउशनस्कवउसदानवदानव
अध्वर्युरथ्वीइष्टिइशित
आहुतिआजू इतिहोताजओता
बर्हिःवरेश्मन्आप्रीआफ्री
गाथागाथापशुपशु
अथर्वन्अथ्रवन्अहिअज़ि
यज्ञयस्नअपांनपात्अपनंपात्

१. १-३ की टि. सं. उपो. पृ. १४२-१४३ में देखें।