काश्यप संहिता (वृद्ध जीवकीय तन्त्र व विद्योतिनी हिन्दी टीका सहित)

काश्यप संहिता (वृद्ध जीवकीय तन्त्र व विद्योतिनी हिन्दी टीका सहित)
Kashyapa Samhita Hindi
महर्षि काश्यप / जीवक (टीकाकार: श्री सत्यपाल भिषगाचार्य) द्वारा
स्रोत: Kashyapa Samhita (Vriddha Jivakiya Tantra) with Vidyotini Hindi Commentary (उद्गम)
DevanagariHindipublished942 पृष्ठ
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विषयानुक्रमणिका
<p align="right">·५६९</p>| विषय | पृ. | पं. | विषय | पृ. | पं. |
|---|---|---|---|---|---|
| बालानां रात्रौ स्नेहमर्दनोपदेशः | १९२ | १ | मदात्यये तर्पणम् | २०५ | १ |
| बालानां दुस्सङ्ग्रहजनितव्रणचिकित्सा | १९२ | ५ | मदात्यये मद्यप्रयोगः | २०५ | २ |
| द्विव्रणीयचिकित्सितोपसंहारः | १९३ | ५ | मदात्यये आहारविधिः | २०५ | ४ |
| प्रतिश्यायचिकित्सिताध्यायः ? । | मदात्यये विहारः | २०६ | ४ | ||
| प्रतिश्यायस्य निदानपूर्विका संप्राप्तिः | १९३ | १० | मदात्यये वर्ज्यानि | २०६ | ६ |
| प्रतिश्यायस्य सामान्यलक्षणम् | १९४ | १ | मदात्यये कतिपययोगाः | २०६ | १० |
| प्रतिश्यायस्य भेदाः | १९४ | ६ | फक्कचिकित्साध्यायः ? । | ||
| प्रतिश्यायस्य वातिकादिभेदेन लक्षणानि | १९४ | ७ | फक्कलक्षणम् | २०८ | १ |
| प्रतिश्यायस्य चिकित्सा | १९५ | २ | फक्कनिदानम् | २०८ | ३ |
| उरोघातचिकित्सिताध्यायः ? । | फक्कभेदाः, तेषां लक्षणानि च | २०८ | ८ | ||
| उरोघातस्य निदानम् | १९७ | ३ | फक्कचिकित्सा | २१० | १ |
| उरोघातस्य चिकित्सा | १९७ | ५ | धात्रीचिकित्सिताध्यायः ? । | ||
| शोथचिकित्सिताध्यायः ? । | धात्रीचिकित्साविषये जीवकस्य प्रश्नाः | २१२ | ३ | ||
| शोथस्य निदानपूर्विका संप्राप्तिः | १९८ | ३ | कश्यपस्योत्तरम् | २१२ | ५ |
| शोथस्य वातिकादिभेदेन लक्षणानि | १९८ | ६ | अग्निभेदेन धात्र्याश्चिकित्सा | २१२ | १० |
| कृमिचिकित्सिताध्यायः ? । | मेदस्विन्याः धात्र्याश्चिकित्सा | २१३ | १० | ||
| बालानां कृमिरोगे विडङ्गघृतम् | २०० | ३ | धात्रीरोगे बलातैलम् | २१३ | १४ |
| बालानां कृमिरोगे पथ्यम् | २०१ | १ | बलातैलातिदेशेनान्येषां तैलानां विधानम् | २१५ | ९ |
| बालानां कृमिरोगे धात्र्या औषधादिसेवनं कर्तव्यं | २०१ | ३ | षष्ठीग्रहस्य निदानं चिकित्सा च | २१७ | १ |
| बालानां कृमिरोगे गुदे कटुतैलप्रयोगः | २०१ | ७ | धात्रीणामजीर्णचिकित्सा | २१७ | १० |
| मदात्ययचिकित्साध्यायः ? । | कौमारभृत्यस्य भिषजः प्रशंसा | २१७ | १६ | ||
| मद्योत्थरोगभेदाः | २०२ | ३ | मातुः प्रशंसा | २१८ | ८ |
| पानात्ययस्य लक्षणम् | २०२ | ४ | सिद्धिस्थानम् ७ । | ||
| पानविभ्रमस्य लक्षणम् | २०२ | ६ | राजपुत्रीया सिद्धिः १ । | ||
| पानापक्रमस्य लक्षणम् | २०२ | ६ | बस्तिकर्मविषये जीवकस्य प्रश्नाः | २१९ | ३ |
| मद्यगुणाः | २०२ | ७ | कश्यपस्योत्तरम् | २१९ | ९ |
| अतिसेवितमद्यदोषाः | २०३ | ५ | बालस्य कदा बस्तिकर्म कार्यमित्यत्र नानामुनीनां मतानि | २२० | १ |
| मदात्ययस्य सामान्यलक्षणम् | २०३ | ९ | बस्तिदानविधिः | २२१ | ५ |
| मदात्ययस्य वाताजादिभेदेन लक्षणानि | २०४ | १ | एकान्तरं बस्तिविधानम् | २२२ | १ |
| मदात्यये लङ्घनम् | २०४ | ५ | निरूहबस्तिगुणाः | २२२ | ५ |
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