काश्यप संहिता (वृद्ध जीवकीय तन्त्र व विद्योतिनी हिन्दी टीका सहित)

काश्यप संहिता (वृद्ध जीवकीय तन्त्र व विद्योतिनी हिन्दी टीका सहित)
Kashyapa Samhita Hindi
महर्षि काश्यप / जीवक (टीकाकार: श्री सत्यपाल भिषगाचार्य) द्वारा
स्रोत: Kashyapa Samhita (Vriddha Jivakiya Tantra) with Vidyotini Hindi Commentary (उद्गम)
DevanagariHindipublished942 पृष्ठ
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५७४ काश्यपसंहिता वा वृद्धजीवकीयं तन्त्रम्
| विषय | पृ. | प | विषय | पृ. | प |
|---|---|---|---|---|---|
| वयोभेदेन भेषजमात्राभेदः | ३७२ | १ | ओदनदोषाः | ३८४ | १२ |
| भेषजमात्रानिर्णयेऽग्न्यृतुसात्म्यादीन्यप्यवेक्षेत | ३७४ | १४ | यवागूसाधनपरिभाषा | ३८५ | १ |
| योगज्ञस्य भिषजः प्रशंसा | ३७५ | ३ | यवागूदोषाः | ३८५ | ४ |
| तीक्ष्णमृदुमध्यौषधयोग्या नराः | ३७६ | ४ | विविधरोगेषु यवागूविधानम् | ३८५ | ८ |
| यूषनिर्देशीयाध्यायः ४ । | भोज्योपक्रमणीयाध्यायः ५ । | ||||
| आहारप्रशंसा | ३७७ | ४ | आहारगुणाः | ३८७ | ९ |
| आहारभेदाः | ३७८ | ३ | भोजनविधिः | ३८७ | १२ |
| आहारगुणः | ३७८ | ८ | आरोग्यलिङ्गानि | ३८८ | ५ |
| यूषगुणाः | ३७९ | ५ | अन्नकालाः | ३८९ | १ |
| यूषनिरुक्तिः | ३७९ | ९ | भोजनविधिनोपभुञ्जतो गुणाः | ३८९ | २ |
| यूषयवाग्वोर्लक्षणम् | ३७९ | ११ | मधुरादिरससात्म्यताया गुणा दोषाश्च | ३९२ | ८ |
| यूषभेदाः | ३७९ | १३ | घृतक्षीरतैलमांससात्म्यताया गुणाः | ३९३ | ३ |
| यूषरागखाडवपानकानां लक्षणम् | ३८१ | १ | भोजनोपकल्पना | ३९३ | ९ |
| वातरोगे हिता यूषाः | ३८१ | ३ | असम्यक्परिपाकहेतवः | ३९४ | ६ |
| क्वाथकल्कयोः पर्यायाः | ३८१ | ८ | समशनस्य लक्षणम् | ३९५ | १ |
| मुद्गयूषः | ३८१ | १० | अध्यशनस्य लक्षणम् | ३९५ | १ |
| विरसिकायूषः | ३८१ | १२ | प्रमृताशनस्य लक्षणम् | ३९५ | २ |
| रोचनयूषः | ३८१ | १३ | विषमाशनस्य लक्षणम् | ३९५ | २ |
| दाडिमयूषः | ३८१ | १३ | विरुद्धाशनस्य लक्षणम् | ३९५ | ३ |
| धात्रीयूषः | ३८१ | १४ | अजीर्णाशनस्य लक्षणम् | ३९५ | ३ |
| चित्रकयूषः | ३८१ | १५ | अत्यशनस्य लक्षणम् | ३९५ | ४ |
| मूलकयूषः | ३८१ | १७ | चतुर्विंशतिभोजनोपकल्पनाः केषु योज्याः | ३९५ | ६ |
| पञ्चकोलयूषः | ३८२ | २ | रसदोषविभागीयाध्यायः ६ । | ||
| धान्ययूषः | ३८२ | ४ | रसदोषविभागज्ञस्य भिषजः प्रशंसा | ३९६ | १ |
| कुलत्थयूषः | ३८२ | ८ | दोषभेदतो व्याधीनां द्विषष्ठिधा कल्पना | ३९६ | ३ |
| फलयूषः | ३८२ | १० | रसानां त्रिषष्ठिधा कल्पना | ३९८ | ३ |
| पुष्पयूषः | ३८२ | १२ | दोषभेदानवेक्ष्य रसा योज्याः | ३९९ | ३ |
| पत्रयूषः | ३८३ | १ | कफजे व्याधौ कटुतिक्तकषायाः क्रमशो योज्याः | ४०० | ३ |
| वल्कलयूषः | ३८३ | ३ | पित्तजे व्याधौ तिक्तस्वादुकषायाः क्रमशो योज्याः | ४०० | ८ |
| पल्लवयूषः | ३८३ | ५ | वातजे व्याधौ लवणाम्लकषायाः क्रमशो योज्याः | ४०० | १२ |
| काम्बलिकयूषः | ३८३ | १० | |||
| महायूषः | ३८३ | १४ | |||
| मूलकयूषः | ३८४ | ४ | |||
| ओदनगुणाः | ३८४ | ११ |