कौटिलीय अर्थशास्त्रम् (सटीक - डॉ. वाचस्पति गैरोला)
Kautiliya Arthashastra with Hindi Commentary by Gairola
आचार्य कौटिल्य (चाणक्य) / डॉ. वाचस्पति गैरोला द्वारा
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संदर्भ में पढ़ें| प्रकरण ११३-११४<br>अध्याय ८ | ## यातव्यवृत्तिः, अनुग्राह्यमित्रविशेषाश्च |
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(१) यातव्योऽभियास्यमानः सन्धिकारणमादातुकामो विहस्तुकामो वा सामवायिकानामन्यतमं लाभद्वैगुण्येन पणेत। प्रपणिता क्षयव्ययप्रवास-प्रत्यवायपरोपकारशरीराबाधांश्चास्य वर्णयेत्। प्रतिपन्नमर्थेन योजयेत्। वैरं वा परैर्ग्राहयित्वा विसंवादयेत्।
(२) दुरारब्धकर्माणं भूयः क्षयव्ययाभ्यां योक्तुकामः स्वारब्धायां वा यात्रायां सिद्धिं विघातयितुकामो मूले यात्रायां वा प्रतिहर्तुकामो यातव्य-संहितः पुनर्याचितुकामः प्रत्युत्पन्नार्थकृच्छ्रस्तस्मिन्नविश्वस्तो वा तदात्वे लाभमल्पमिच्छेदायत्यां प्रभूतम्।
(३) मित्रोपकारममित्रोपघातमर्थानुबन्धमवेक्षमाणः पूर्वोपकारकं कारयितुकामो भूयस्तदात्वे महान्तं लाभमुत्सृज्यायत्यामल्पमिच्छेत्।
यातव्य सम्बन्धी व्यवहार और अनुग्रह करने वाले मित्रों के प्रति कर्त्तव्य
( १ ) यातव्य विजिगीषु को चाहिए कि आक्रमण करने से पहिले ही वह, सन्धि के कारणों को मानने वाले या उसकी अपेक्षा न रखने वाले सहायक ( सामवायिक ) के रूप में किसी एक सामंत के साथ, पूर्व निश्चित लाभ से, दुगुना लाभ देकर सन्धि कर ले । तदनन्तर उस साथी सामन्त के समक्ष वह : सेनाक्षय, धनव्यय, दूर प्रवास, मार्ग के विघ्न, शत्रुपक्ष में घुसकर उसका उपकार करना और शरीर पीड़ा आदि दोषों या बाधाओं को खोलकर रख दें । यदि वह इन सब बाधाओं को झेलना स्वीकार कर ले तो उसे प्रतिज्ञात धन दे दे । इसके विपरीत यदि वह सन्धि के कारणों को स्वीकार न करे तो दूसरे सामन्त से उसका विरोध करा कर, उससे अपनी सन्धि तोड़ दे ।
( २ ) अनुचित देश-काल में युद्ध-यात्रा का आरम्भ कर सामन्त को क्षय-व्यय-ग्रस्त करने की इच्छा रखने वाला या उचित देश-काल में युद्ध यात्रा करके अवश्य-म्भावी सिद्धि का विधान करने की इच्छा वाला या यात्रा करने पर दुर्ग आदि के ऊपर आक्रमण करने की इच्छा वाला; या यातव्य से पहिले थोड़ा ही लेकर सन्धि करके फिर अधिक माँग की इच्छा रखने वाला या आकस्मिक अर्थ-कष्ट से ग्रसित या यातव्य में अविश्वास करने वाला; उस समय थोड़ा ही लाभ लेकर सन्धि कर ले और फिर भविष्य में अधिक धन लेने की इच्छा करे ।
( ३ ) यदि उसे यह सम्भावना हो कि आगे चलकर मित्र से उसको लाभ होगा;